Edited By Kuldeep, Updated: 04 May, 2026 03:42 PM

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व सैनिक भर्ती से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने धार टटोह निवासी एवं वर्तमान में बरमाणा थाना के अंतर्गत ट्रैफिक पुलिस में हैड कांस्टेबल के पद पर सेवाएं दे रहे पूर्व सैनिक नंद लाल ठाकुर...
बिलासपुर (अंजलि): हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व सैनिक भर्ती से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने धार टटोह निवासी एवं वर्तमान में बरमाणा थाना के अंतर्गत ट्रैफिक पुलिस में हैड कांस्टेबल के पद पर सेवाएं दे रहे पूर्व सैनिक नंद लाल ठाकुर के पक्ष में निर्णय देते हुए उन्हें वर्ष 2009 से सब-इंस्पैक्टर पद पर नियुक्ति देने के आदेश जारी किए हैं।
अदालत के इस फैसले का सीधा लाभ यह होगा कि यदि उन्हें 2009 से नियुक्ति का लाभ दिया जाता है, तो वे डीएसपी के पद से सेवानिवृत्त होंगे। उनकी सेवानिवृत्ति आगामी जून में प्रस्तावित है। न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज की एकल पीठ ने कहा कि चयन प्रक्रिया में सीनियोरिटी को आधार बनाने का कोई प्रावधान नहीं था।
जानकारी के अनुसार नंद लाल ठाकुर ने सब-इंस्पैक्टर पद के लिए आवेदन किया था और इंटरव्यू में चयनित कई उम्मीदवारों से अधिक अंक प्राप्त किए थे। इसके बावजूद उन्हें नियुक्ति नहीं दी गई, जबकि कम अंक पाने वाले उम्मीदवारों को नियुक्त कर दिया गया। राज्य सरकार ने दलील दी कि वर्ष 2005 में सेवानिवृत्त उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने और पंजीकरण सीनियोरिटी के आधार पर चयन किया गया था लेकिन अदालत ने इस तर्क को असंवैधानिक बताते हुए खारिज कर दिया।
अदालत ने कहा कि अंक आधारित चयन प्रक्रिया में अधिक अंक वाले उम्मीदवार को नजरअंदाज करना मनमाना और असंवैधानिक कदम है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहले से नियुक्त उम्मीदवारों की सेवा रद्द नहीं होगी, क्योंकि नियुक्ति प्रक्रिया में उनकी कोई गलती नहीं थी। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि नंद लाल ठाकुर को 3 महीने के भीतर सब-इंस्पैक्टर पद पर नियुक्त किया जाए। वर्ष 2009 से सभी सेवा लाभ, वरिष्ठता और वित्तीय लाभ प्रदान किए जाएं। यदि पद उपलब्ध न हो तो अतिरिक्त पद सृजित किया जाए।