वफादारी की मिसाल: मौत के जबड़ाें से 2 जिंदगियां छीन लाए गद्दी कुत्ते; 3 घंटे की जंग के बाद शिकारी जिंदा काबू

Edited By Vijay, Updated: 23 Feb, 2026 09:49 PM

fight between leopard and dogs

जिला सिरमौर में वन मंडल नाहन के अंतर्गत सतीवाला पंचायत में रविवार-सोमवार रात वफादारी और वन्य शक्ति के बीच ऐसी मूक जंग छिड़ी, जिसने सुबह होते ही पूरे इलाके में सनसनी फैला दी।

नाहन (आशु वर्मा): जिला सिरमौर में वन मंडल नाहन के अंतर्गत सतीवाला पंचायत में रविवार-सोमवार रात वफादारी और वन्य शक्ति के बीच ऐसी मूक जंग छिड़ी, जिसने सुबह होते ही पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। पंचायत के जोगीबन गांव स्थित एक गोट (बकरी) फार्म में घुसे तेंदुए ने खौफ का मंजर खड़ा कर दिया, लेकिन फार्म की सुरक्षा में तैनात शेरदिल गद्दी कुत्तों ने अपनी जान की परवाह किए बिना मोर्चा संभाला और न केवल दर्जनों बकरियों को बचाया, बल्कि 2 युवकों संग्राम और नीरज को भी मौत के जबड़ों से खींच लाए।

जानकारी के अनुसार रात के अंधेरे में जैसे ही तेंदुआ फार्म में दाखिल हुआ तो गद्दी कुत्तों की टोली सतर्क हो गई। भौंकते और घेरा बनाते हुए उन्होंने शिकारी को एक कोने में जकड़ दिया। रातभर यह मूक टकराव जारी रहा। सुबह गेट खुलते ही घिरा हुआ तेंदुआ बौखला गया। बच निकलने की कोशिश में वह पास के नाले के संकरे कलवर्ट (पाइप) में जा घुसा, लेकिन उससे पहले उसने संग्राम और नीरज पर हमला कर दिया। कुछ पल के लिए माहौल सन्न रह गया। अचानक हुए इस हमले से अफरा-तफरी मच गई, लेकिन गद्दी कुत्तों ने बहादुरी दिखाते हुए तेंदुए का ध्यान भटकाया और युवकों को उसके पंजों से छुड़ा लिया। इस घटनाक्रम का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो भी सामने आया है।

सोमवार दोपहर करीब 1 बजे वन्य प्राणी विभाग की टीम मौके पर पहुंची। चुनौती बेहद कठिन थी, क्योंकि संकरे पाइप में छिपे तेंदुए को बिना किसी अनहोनी के जिंदा पकड़ना था। पहले पाइप के एक सिरे को मजबूत जाली से बंद किया गया और दूसरे सिरे पर पिंजरा लगाया गया। जब यह प्रयास नाकाम रहा तो जाली की ओर से ट्रैंक्विलाइजर गन से बेहोशी का इंजैक्शन दागा गया, लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी थी। पाइप के भीतर पानी का रिसाव हो रहा था और यह तय करना जरूरी था कि तेंदुआ पूरी तरह बेहोश है या नहीं। जान जोखिम में डालते हुए एक वनरक्षक पाइप के भीतर घुसा, तेंदुए को रस्सी से बांधा और धीरे-धीरे बाहर खींचा गया। करीब साढ़े 3 बजे ऑप्रेशन सफल हुआ और लोगों ने राहत की सांस ली। रैस्क्यू के बाद तेंदुए को प्राथमिक उपचार के लिए शंभूवाला वन परिक्षेत्र में लाया गया और बाद में उसे टूटीकंडी रैस्क्यू सैंटर भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई।

इस पूरे ऑप्रेशन के दौरान सैंकड़ों ग्रामीण घटनास्थल पर जमा रहे, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई थी। अधिकारियों को आशंका थी कि यदि तेंदुआ अचानक होश में आकर आक्रामक हो जाता तो भीड़ में बड़ा हादसा हो सकता था। शाम साढ़े 4 बजे तक तेंदुआ बेहोशी की अवस्था में ही था। कुल मिलाकर यह घटना जहां वन्यजीवों की बढ़ती आवाजाही की ओर संकेत करती है, वहीं गद्दी कुत्तों की निष्ठा और साहस का भी उदाहरण प्रस्तुत करती है। समय पर की गई कार्रवाई से दोनों युवकों संग्राम व नीरज की जान बची और एक घायल वन्यजीव को भी सुरक्षित संरक्षण मिल सका। उधर, वन मंडल नाहन के डीएफओ अवनी भूषण राय ने बताया कि लगभग 3 घंटे चले इस जटिल ऑप्रेशन के बाद तेंदुए को सुरक्षित रैस्क्यू कर लिया गया है। उन्होंने गद्दी कुत्तों की बहादुरी और टीम की तत्परता की भी सराहना की।

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