Kullu: अपनी संस्कृति को भूलना समाज के लिए घातक : जयराम

Edited By Kuldeep, Updated: 10 Jan, 2026 09:03 PM

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देवभूमि हिमाचल की समृद्ध संस्कृति और अटूट आस्था का अद्भुत संगम शनिवार को बंजार के बलागाड़ में देखने को मिला। यहां आदि शक्ति मां वल्ले दुर्गा और महर्षि मार्कंडेय जी के नवनिर्मित रथों की पावन प्राण-प्रतिष्ठा का आयोजन हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।

​बंजार (कुल्लू): देवभूमि हिमाचल की समृद्ध संस्कृति और अटूट आस्था का अद्भुत संगम शनिवार को बंजार के बलागाड़ में देखने को मिला। यहां आदि शक्ति मां वल्ले दुर्गा और महर्षि मार्कंडेय जी के नवनिर्मित रथों की पावन प्राण-प्रतिष्ठा का आयोजन हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। ​इस आयोजन में मां दुर्गा, महर्षि मार्कंडेय (बलागाड़) और ऋषि मार्कंडेय (पेड़चा) के रथों के मिलन से हजारों श्रद्धालु भाव-विभोर हुए। पूरे क्षेत्र में 'अठारह करडू की जय-जयकार' के उद्घोष से वातावरण देवमय हो गया। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने विशेष रूप से उपस्थित होकर देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त किया और प्रदेश की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। इस दौरान स्थानीय विधायक सुरेंद्र शौरी व पूर्व मंत्री ने जयराम ठाकुर का स्वागत किया।

इस मौके पर जयराम ठाकुर ने कहा कि देव परंपराएं, देव आस्थाएं और देव अवस्थाएं हमारी विशिष्ट पहचान हैं। हम पहाड़ी लोग सदियों से देव संस्कृति से जुड़े रहे हैं और यही संस्कार हमारी सामाजिक एकता और आत्मिक शक्ति का मुख्य आधार हैं। उन्होंने कहा कि हम दुनिया के किसी भी कोने में रहें, अपनी जड़ों व संस्कृति से जुड़े रहना ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। अपनी पहचान को भूलना समाज और संस्कृति दोनों के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश के विभिन्न हिस्सों और विशेषकर महानगरों में सनातन संस्कृति व धार्मिक आस्थाओं पर योजनाबद्ध तरीके से प्रहार किए जा रहे हैं। ऐसे समय में समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। हमें अपनी सांस्कृतिक पहचान और मूल्यों को सहेजने के लिए निरंतर प्रयास करने होंगे।

​अयोध्या का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि 5 वर्षों के लंबे संघर्ष और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सशक्त नेतृत्व में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण संभव हुआ है। श्रीराम मंदिर हमारी सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय चेतना का गौरवशाली प्रतीक है। इसी भावना के साथ हमें अपने स्थानीय देवस्थलों के प्रति समर्पित रहना चाहिए। उन्होंने देवी-देवताओं से प्रदेशवासियों की आपदाओं से रक्षा करने और सभी पर कृपा बनाए रखने की कामना की। पूर्व सांसद महेश्वर सिंह ने कहा कि देव संस्कृति के संरक्षण के लिए ऐसे आयोजन अत्यंत आवश्यक हैं। इस दौरान आयोजन समिति ने पूर्व मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों को सम्मानित किया। इस मौके पर देवता मार्कंडेय ऋषि मंगलौर के प्रतिनिधि पुरुषोत्तम शर्मा, कारदार मार्कंडेय ऋषि बलागाड़ चुनी लाल शर्मा, श्रवण शर्मा, देव समाज से दोत राम, ठाकुर चंद महंत व सत्यदेव शर्मा सहित कारदार उपस्थित रहे।

 

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