Kangra: आवारा कुत्तों के खतरे की रोकथाम हेतु हिमाचल सरकार का कड़ा रुख : सर्वोच्च न्यायालय

Edited By Kuldeep, Updated: 26 Nov, 2025 10:29 PM

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हिमाचल प्रदेश सरकार के पंचायती राज विभाग ने संस्थागत और सार्वजनिक क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे और काटने की घटनाओं की रोकथाम के लिए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है।

डाडासीबा (सुनील): हिमाचल प्रदेश सरकार के पंचायती राज विभाग ने संस्थागत और सार्वजनिक क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे और काटने की घटनाओं की रोकथाम के लिए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। यह कदम माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एक रिट याचिका के बाद दिए गए बाध्यकारी निर्देशों के तत्काल अनुपालन के लिए उठाया गया है। पंचायती राज विभाग के निदेशक राघव शर्मा ने समस्त जिला पंचायत अधिकारियों, खंड विकास अधिकारियों और ग्राम पंचायतों को तत्काल क्रियान्वयन हेतु विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत सभी ग्राम पंचायतें अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले स्कूल, स्वास्थ्य उपकेंद्र, पंचायत घर, बस स्टैंड और खेल के मैदान जैसे सभी संस्थागत और सार्वजनिक स्थलों का त्रैमासिक निरीक्षण करेंगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन परिसरों के भीतर या आसपास आवारा कुत्तों का कोई निवास स्थान न हो।

आवारा कुत्तों का पता चलने पर पंचायतों को जिला मैजिस्ट्रेट की समग्र देखरेख में पशुपालन विभाग और नगर पालिका अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करना होगा। कुत्तों को हटाने के साथ-साथ पशु जन्म नियंत्रण नियम 2021 के अनुसार पशु चिकित्सा औषधालयों के माध्यम से नसबंदी और टीकाकरण अभियान चलाए जाएंगे। नसबंदी के बाद कुत्तों को निकटतम कुत्ता आश्रय गृह में ले जाने का व्यय वित्त आयोग द्वारा निर्धारित 15 प्रतिशत सभा निधि से वहन किया जाएगा।

पंचायत सचिव अथवा ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी तय
निवारक उपायों पर जोर देते हुए यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि स्कूलों और सार्वजनिक संस्थानों के परिसरों की उचित ढंग से सुरक्षा और घेराबंदी की जाए। साथ ही उचित अपशिष्ट प्रबंधन, कचरे के दैनिक निपटान और स्कूलों तथा स्वास्थ्य केंद्रों से खाद्य अपशिष्ट को हटाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता गतिविधियां चलाकर जानवरों के आसपास सुरक्षित व्यवहार और कुत्तों के काटने पर प्राथमिक उपचार की जानकारी भी दी जाएगी। जारी आदेशों में जवाबदेही पर कड़ा रुख अपनाया गया है। निरीक्षण या रिपोर्टिंग में किसी भी चूक या विफलता को गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित पंचायत सचिव अथवा ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

पंचायत सचिवों को भेजी प्रति
अनुपालना रिपोर्ट की सुनिश्चितता के लिए खंड विकास अधिकारियों को जिला पंचायत अधिकारी को त्रैमासिक समेकित रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। यह विस्तृत कार्रवाई माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप आवारा पशु मुक्त और सुरक्षित संस्थागत परिसर सुनिश्चित करने में पंचायती राज संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी को अनिवार्य बनाती है। इस संदर्भ में जब खंड विकास अधिकारी परागपुर अशोक कुमार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा जारी पत्र की प्रति पंचायत सचिवों को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित कर दी गई है।

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