हाईकोर्ट की निगरानी में हो पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले की सीबीआई जांच : मुकेश अग्निहोत्री

Edited By Vijay, Updated: 19 May, 2022 04:48 PM

congress leader mukesh agnihotri

पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले की सीबीआई जांच हाईकोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए और हाईकोर्ट के समक्ष इसका रिव्यू तयशुदा दिनों में होता रहे कि आखिर जांच में क्या हो रहा है व जांच का रिजल्ट क्या निकल रहा है। यह बात ऊना में कांग्रेसी नेता सुधीर शर्मा,...

ऊना (सुरेन्द्र): पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले की सीबीआई जांच हाईकोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए और हाईकोर्ट के समक्ष इसका रिव्यू तयशुदा दिनों में होता रहे कि आखिर जांच में क्या हो रहा है व जांच का रिजल्ट क्या निकल रहा है। यह बात ऊना में कांग्रेसी नेता सुधीर शर्मा, इंटक नेता बावा हरदीप सिंह व अन्य की मौजूदगी में पत्रकारों से बात करते हुए नेता विपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कही। उन्होंने कहा कि नौकरियों के लिए केवल 2 ही काम हो रहे हैं या सौदा हो रहा है या तो सिफारिश हो रही है और मैरिट का तो गला ही घोंट दिया गया है। पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले में बड़े मगरमच्छ शामिल हैं। जांच के स्कैनर में पुलिस है और पुलिस के पीछे प्रदेश की जयराम सरकार है।

मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि तुरंत प्रभाव से इस मामले में एसआईटी जांच बंद करनी चाहिए। एसआईटी सबूतों को मिटा देगी। पुलिस की जांच पुलिस को ही सौंप दी गई है तो स्वाभाविक है कि जांच सही नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि एसआईटी में जयराम सरकार ने उन पुलिस अधिकारियों को ही शामिल कर दिया, जिन पर पुलिस भर्ती पेपर की जिम्मेदारी थी। एसआईटी के सहारे जांच प्रभावित और मामला रफा-दफा करने का प्रयास जयराम सरकार ने किया है।

मुकेश अग्रिहोत्री ने कहा कि सरकार और पुलिस की मिलीभगत के बिना यह पेपर लीक नहीं हो सकता था। सही मायने में यह पेपर लीक नहीं हुआ, बल्कि पेपर की नीलामी की गई है। सौदा 6 से 8 लाख रुपए में हुआ और दूसरे राज्यों में अभ्यर्थियों को ग्रुप्स में पेपर की तैयारी करवाई गई। इस मामले को दबाने का जयराम ठाकुर ने बहुत प्रयास किया और दबाव में एफआईआर दर्ज करनी पड़ी। फिर मामले को ठंडे बस्ते में डालने के लिए एसआईटी बना दी गई।

मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि 73 लोग वे अरैस्ट किए गए हैं, जिन्होंने पेपर रुपए देकर खरीदा है, जबकि वे लोग अरैस्ट नहीं किए जा रहे जिन्होंने इसे बेचा है। एसआईटी इस फॉर्मैट पर कार्रवाई कर रही है कि किस-किस ने पेपर खरीदा है जबकि जांच इसकी भी होनी चाहिए थी कि बेचा किसने। उन्हाेंने कहा कि यह अपने आप में लगभग 100 करोड़ रुपए का घोटाला है और इस घोटाले में भाजपा की जयराम सरकार दफन हो जाएगी।

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