हिमाचल में एंट्री टैक्स पर CM सुक्खू का बड़ा बयान, जानें किसे मिल सकती है राहत

Edited By Jyoti M, Updated: 25 Mar, 2026 12:54 PM

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हिमाचल प्रदेश विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान प्रदेश की सीमाओं पर लगने वाले एंट्री टैक्स का मुद्दा गरमाया रहा। भाजपा विधायक राकेश जम्वाल, सुखराम चौधरी और कांग्रेस विधायक राकेश कालिया ने टैक्स में बढ़ोतरी को लेकर सरकार से जवाब माँगा।

हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान प्रदेश की सीमाओं पर लगने वाले एंट्री टैक्स का मुद्दा गरमाया रहा। भाजपा विधायक राकेश जम्वाल, सुखराम चौधरी और कांग्रेस विधायक राकेश कालिया ने टैक्स में बढ़ोतरी को लेकर सरकार से जवाब माँगा।

सीएम सुक्खू का स्पष्टीकरण:

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सदन में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि टैक्स को लेकर जितना शोर मचाया जा रहा है, हकीकत वैसी नहीं है। 

कमर्शियल वाहन: यह टैक्स केवल व्यावसायिक (Commercial) वाहनों पर लगाया गया है, निजी गाड़ियों पर नहीं।

राजस्व में वृद्धि: टोल टैक्स की नीलामी से सरकार को 185 करोड़ रुपये की उम्मीद थी, लेकिन बोली 228 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

पुराना नियम: सीएम ने याद दिलाया कि एंट्री और टोल टैक्स पिछले 30 सालों से लागू है। इसे केवल महंगाई के हिसाब से एडजस्ट किया गया है।

बॉर्डर पर रहने वालों को मिल सकती है राहत

कांग्रेस विधायक राकेश कालिया ने पंजाब सीमा से सटे इलाकों के लोगों की समस्या उठाई। उन्होंने कहा कि लोगों का काम और रिश्तेदारियां पंजाब में हैं और वे रोज आते-जाते हैं।

सीएम का जवाब: मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल की स्थानीय गाड़ियों पर कोई टैक्स नहीं है और अब इसे Fastag से जोड़ दिया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जो लोग रोजाना काम के सिलसिले में सीमा पार करते हैं, उन्हें विशेष पास देने पर विचार किया जा सकता है।

विपक्ष की चिंता: "जनता पर पड़ेगा तीन गुना बोझ"

भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने पंजाब सरकार के संभावित फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अगर पंजाब भी एंट्री टैक्स और बैरियर लगाता है, तो जनता को तीन-तीन जगहों पर टैक्स देना पड़ेगा। इससे आम आदमी की जेब पर भारी बोझ पड़ेगा।

सीएम सुक्खू ने विपक्ष और पंजाब के मंत्रियों पर पलटवार करते हुए कहा कि वे तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी केवल सेस लगाने का अधिकार पाने के लिए बिल लाया गया है।

राज्यपाल की मंजूरी के बाद कैबिनेट यह तय करेगी कि सेस लगाना है या नहीं। 

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