शहीद अंकुश के घर पहुंचे सीएम जयराम, परिवार को 20 लाख की सहायता

Edited By prashant sharma, Updated: 20 Jun, 2020 01:51 PM

cm jairam arrives at the house of martyr ankush

भारत-चीन एलएसी विवाद में शहीद हुए हिमाचल से ताल्लुक रखने वाले जवान अंकुश ठाकुर के परिवार से मिलने के लिए शनिवार को सीएम जयराम ठाकुर उनके घर पहुंचे।

हमीरपुरः भारत-चीन एलएसी विवाद में शहीद हुए हिमाचल से ताल्लुक रखने वाले जवान अंकुश ठाकुर के परिवार से मिलने के लिए शनिवार को सीएम जयराम ठाकुर उनके घर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने घोषणा की कि शहीद के नाम पर करोहता गांव को जोड़ने वाली सड़क पर शहीद के नाम से द्वार बनेगा। वहीं राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मनोह को शहीद के नाम से जाना जाएगा। गांव में शहीद की प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी। प्रदेश सरकार शहीद परिवार को बीस लाख की आर्थिक सहायता भी प्रदान करेगी।ये बातें सीएम जयराम ठाकुर ने शहीद के पैतृक निवास करोहता पहुंचने के उपरांत कही। वह आज शहीद के परिजनों से मिलने शिमला से करोहता पहुंचे थे। सीएम जयराम ठाकुर ने शहीद के पिता अनिल ठाकुर व मां उषा रानी सहित अन्य स्वजनों से मिलकर संवेदना व्यक्त की। 
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सीएम जयराम ठाकुर ने इसके बाद बातचीत में कहा कि शहीद के गांव के लिए रास्ता बनाया जाएगा, चूंकि जो रास्ता गांव से श्मशान घाट को जाता है उसकी हालत ठीक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मनोह का नाम शहीद के नाम पर रखा जाएगा। इसके अलावा शहीद परिवार ने शहीद की प्रतिमा गांव में लगाने की इच्छा जाहिर की है, जिस पर अमल किया जाएगा। इस संबंध में शहीद के परिजनों ने सीएम जयराम ठाकुर को एक पत्र भी सौंपा है। इस पर सीएम ने डीसी हमीरपुर हरिकेश मीणा को कार्य करने का आदेश दे दिया। सीएम ने शहीद के गांव में स्थित प्राईमरी स्वास्थ्य केंद्र को भी अपग्रेड करने का आश्वासन दिया है। 

शहीद के परिजन चाहते हैं कि अंकुश ठाकुर का भाई अभी छोटा है, इसलिए सरकार उसके चचेरे भाई की मदद करे। हालांकि, इस पर सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं मिल पाया। गलवान घाटी में चीनी सैनिकों से हिंसक झड़प में हमीरपुर के उपमंडल भोरंज के गांव करोहता का 21 वर्षीय जवान भी शहीद हो गया था। बीते कल ही उसका सैन्य सम्मान के बीच अंतिम संस्कार हुआ है। प्रदेश सरकार की तरफ से पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर शामिल हुए थे। शहीद जवान अंकुश ठाकुर वर्ष 2018 में पंजाब रेजीमेंट में भर्ती हुआ था। अंकुश ठाकुर के पिता और दादा भी भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके हैं। 10 माह पहले ही अंकुश ने रंगरूटी काटकर घर से सेना की नौकरी ज्वाइन की थी। शहीद का छोटा भाई छठीं कक्षा में पढ़ता है।
 

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