Bilaspur: एम्स में पहली बार ईवीए तकनीक शुरू करने की तैयारी

Edited By Kuldeep, Updated: 11 Feb, 2026 05:55 PM

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गंभीर बीमारियों के चलते लंबे समय तक वैंटिलेटर पर रखे जाने वाले मरीजों के उपचार में सुधार लाने के उद्देश्य से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर में अत्याधुनिक एक्सपिरेट्री वैंटिलेटर असिस्टैंट (ईवीए) तकनीक शुरू करने की तैयारी कर ली गई...

बिलासपुर (बंशीधर): गंभीर बीमारियों के चलते लंबे समय तक वैंटिलेटर पर रखे जाने वाले मरीजों के उपचार में सुधार लाने के उद्देश्य से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर में अत्याधुनिक एक्सपिरेट्री वैंटिलेटर असिस्टैंट (ईवीए) तकनीक शुरू करने की तैयारी कर ली गई है। एम्स प्रशासन ने इस मशीन की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस सुविधा के शुरू होने के बाद हिमाचल प्रदेश में पहली बार किसी स्वास्थ्य संस्थान में यह अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध होगी।

जानकारी के अनुसार ईवीए एक आधुनिक वैंटिलेटरी असिस्ट डिवाइस है, जो विशेष रूप से उन मरीजों के लिए उपयोगी साबित होती है, जो लंबे समय से वैंटिलेटर पर हैं या जिनके फेफड़े पारंपरिक वैंटिलेटर के दबाव को सहन करने में सक्षम नहीं होते। यह तकनीक मरीज को सांस छोड़ने की प्रक्रिया में सक्रिय सहायता प्रदान करती है, जिससे फेफड़ों पर पड़ने वाला दबाव कम हो जाता है और संक्रमण का खतरा भी घटता है। विशेषज्ञों के अनुसार गंभीर स्थिति में मरीजों को लंबे समय तक वैंटिलेटर पर रखना पड़ता है, जिससे कई बार फेफड़ों में जटिलताएं और वैंटिलेटर से जुड़े निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है। ईवीए तकनीक इस जोखिम को कम करने में सहायक मानी जाती है।

इस तकनीक की मदद से मरीज के शरीर से कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालने में भी सक्रिय सहायता मिलती है तथा गंभीर श्वसन विफलता वाले मरीजों के ऑक्सीजन स्तर में तेजी से सुधार संभव होता है। इसके अलावा यह मशीन आकार में कॉम्पैक्ट होती है, जिससे आपातकालीन स्थिति में मरीज को एक स्थान से दूसरे स्थान पर शिफ्ट करते समय भी इसका उपयोग किया जा सकता है। चिकित्सकों का मानना है कि ईवीए तकनीक से मरीज को पारंपरिक वैंटिलेटर से जल्द हटाने में सहायता मिल सकती है, जिससे फेफड़ों के नाजुक ऊतकों को नुक्सान से बचाया जा सकेगा और मरीज की रिकवरी बेहतर होगी।

वर्तमान में प्रदेश के किसी भी सरकारी या निजी स्वास्थ्य संस्थान में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। गंभीर श्वसन समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को अभी तक पीजीआई चंडीगढ़ या एम्स दिल्ली रैफर करना पड़ता है। ऐसे में एम्स बिलासपुर द्वारा इस तकनीक को शुरू करने की पहल प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। एम्स प्रशासन का मानना है कि इस सुविधा के शुरू होने से प्रदेश में क्रिटिकल केयर सेवाओं को मजबूती मिलेगी और मरीजों को उच्च स्तरीय उपचार के लिए बाहरी राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

 

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