Kangra: देवी-देवताओं के आगमन से श्रद्धा की रंगत से सराबोर हुई शिव नगरी

Edited By Kuldeep, Updated: 15 Feb, 2026 06:54 PM

baijnath shivratri festival

बैजनाथ में मनाए जा रहे राज्य स्तरीय शिवरात्रि महोत्सव में देवी-देवताओं की मौजूदगी ने शिवनगरी की श्रद्धा की रंगत को और बढ़ा दिया है।

विज्ञान के युग में चमत्कार से कम नहीं देवी-देवताओं की शक्तियां, 10 दिन की पैदलयात्रा के बाद पहुंचे देव गहरी न्याय के देवता
बैजनाथ (विकास):
बैजनाथ में मनाए जा रहे राज्य स्तरीय शिवरात्रि महोत्सव में देवी-देवताओं की मौजूदगी ने शिवनगरी की श्रद्धा की रंगत को और बढ़ा दिया है। मंडी और कांगड़ा जिलों के दूरदराज क्षेत्रों से आए देवी-देवता महोत्सव में आने वाले लोगों के लिए श्रद्धा का केंद्र बने हुए हैं। पालकियों में सजे धजे देवी-देवताओं के रथों के साथ आए देवलुओं और बजंतरियों की स्वर लहरियां समूचे क्षेत्र के माहौल को गुंजायमान कर रहे हैं। इनमें से कोई चिकित्सा के क्षेत्र में महारत प्राप्त हैं, कोई प्राकृतिक आपदा की सटीक भविष्यवाणी करते हैं तो कोई जादू-टोना को तुरंत बेअसर कर देते हैं। देवी देवता सात्विक आचार व्यवहार की पालना करते हैं। उन्हें कतई मंजूर नहीं कि उनके पास मीट-मछली अंडा या फिर चमड़े की वस्तु लेकर आएं। अवमानना पर कोपभाजन होना पड़ता है।

हालांकि पूर्व समय में इक्का-दुक्का देवी-देवता शिवरात्रि के दौरान बैजनाथ में शिरकत करते थे लेकिन यह पहला मौका है कि बैजनाथ में इतने बड़े स्तर पर देवी-देवताओं ने शिरकत की है। छोटा भंगाल घाटी के नेर गांव के देव गहरी न्याय के देवता माने जाते हैं। शान-ए-छोटा भंगाल ख्याति प्राप्त देवता के साथ आए कमेटी के प्रधान संजय ठाकुर और गुर हलकू राम बताते हैं कि देवता पहाड़ी रास्तों से होकर 10 दिन की पैदलयात्रा के बाद पहुंचे हैं। कोर्ट में न्याय न मिलने पर देवता की शरण में जाने से न्याय मिलता है। अमूमन देवता अपने मूल स्थान में ही निवास करते हैं, जबकि 3 महीने श्रद्धालुओं के बुलावे पर उनके घर द्वार पर भी पहुंचते हैं। बेशक आधुनिक विज्ञान ने जितनी भी तरक्की कर ली हो लेकिन इन परंपरागत देवी-देवताओं की अभूतपूर्व शक्तियां विज्ञान के इस युग में किसी अनसुलझी पहेली से कम नहीं हैं।

देवताओं के साथ आए गुरों के बोल
जय मां चतुर्भुजा की उत्पत्ति जोगिंद्ररनगर के आरठ गांव में स्वयंभू हुई है। महिला गुर पानो देवी बताती हैं कि तकरीबन 25 साल पहले बीमार हुई थीं तो मां ने स्वप्न में दर्शन दिए थे। स्वप्न के अनुरूप जब निर्धारित स्थान पर खुदाई की तो माता की मूर्ति निकली बस तभी से वह माता रानी की रंगत में रंगती चली गईं।

देव गहरी संगरेहड़ के गुर भाग सिंह बताते हैं कि स्थानीय त्यौहार की संक्रांति और शारनू के दौरान देवता अलौकिक यौवन पर होते हैं और बीमारी के लिए प्रसिद्ध हैं किसी भी बीमारी होने पर में जाने से बीमारियां दूर हो जाती हैं। बर्फीले दर्रे को लांघ शिव धाम पहुंचे हैं।

जोगिंद्रनगर के ढ़ेलू से तालुक रखने वाली मां नवदुर्गा भी 30 वर्ष पहले जमीन से स्वयंभू प्रकट हुई है। वर्तमान में यह देवी क्षेत्र वासियों के लिए आस्था की पर्याय है। मां महाकाली सिद्ध बाबा चानो सिद्ध की तर्ज पर जादू-टोना को तुरंत काबू कर लेते हैं और पीड़ित को राहत प्रदान करते हैं। देवी के साथ आए गुर नेकराम बताते हैं कि यह देवता पीड़ितों के साथ सदैव खड़े रहते हैं और उन्हें राहत पहुंचाने में देर नहीं करते।

जगजननी महाकाली तुलाह स्वयंभू प्रकट हुई हैं। गुर रोहित ठाकुर बताते हैं कि चामुंडा ज्वालाजी चिंतपूर्णी और बगलामुखी को यह देवी अपनी बहनें मानती हैं। यही वजह है कि यह देवी स्वयं बजंतरियों को अपनी बहनों से मिलवाने का आदेश देती हैं और प्रत्येक वर्ष उनसे मिलने जाती हैं। मां संतोषी के साथ पहुंची महिला गुर कमला देवी बताती हैं कि पिछले 50 वर्षों से वे महामाई के आस्था में तालीन हैं। देवी उन्हें बुजुर्गों से विरासत में मिली थीं। उनके जीवन में जितने भी कष्टदायक क्षण आए महामाई ने छूमंतर कर दिए।

लौटते वक्त पर्याप्त नजराना दिया जाएगा : गौतम
शिवरात्रि महोत्सव समिति के अध्यक्ष संकल्प गौतम ने कहा कि निश्चित तौर पर कांगड़ा और मंडी के से आए देवी-देवताओं ने महोत्सव में चार चांद लगा दिए हैं। प्रशासन द्वारा देवताओं के साथ आए बजंतरियों, पुजारियों और गुरों के रहने खाने की व्यवस्था की है। लौटते वक्त पर्याप्त नजराना भी दिया जाएगा। सभी देवता अपनी-अपनी चमत्कारिक शक्तियों में महारत प्राप्त हैं लोग आस्था अनुरूप नतमस्तक हो रहे हैं।

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