युद्ध के कारण बेकाबू हुईं API की कीमतें, MSME सेक्टर में हाहाकार, क्या अब महंगी हो जाएंगी दवाइयां?

Edited By Jyoti M, Updated: 20 Mar, 2026 11:30 AM

api prices spiral out of control due to war msme sector in turmoil

युद्ध की लहरों ने कच्चे माल की कीमतों में ऐसा उबाल लाया है कि हिमाचल प्रदेश जैसे दवा हब (Pharma Hub) के कारखानों में 'इकोनॉमिक ब्लैकआउट' का खतरा मंडराने लगा है।

हिमाचल डेस्क। युद्ध की लहरों ने कच्चे माल की कीमतों में ऐसा उबाल लाया है कि हिमाचल प्रदेश जैसे दवा हब (Pharma Hub) के कारखानों में 'इकोनॉमिक ब्लैकआउट' का खतरा मंडराने लगा है।

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक सप्लाई चेन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, जिसका सबसे घातक असर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) पर दिख रहा है। दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतों में आई बेतहाशा तेजी ने उद्योगपतियों की रातों की नींद उड़ा दी है। बाजार में कच्चे माल की कृत्रिम कमी और बढ़ते दामों ने उत्पादन लागत को पटरी से उतार दिया है। सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति जीवन रक्षक दवाओं की है।

पैरासिटामोल API जो कच्चा माल पहले 250 रुपये प्रति किलो मिलता था, वह अब 450 रुपये के स्तर को पार कर चुका है। सॉल्वेंट्स, एक्सिपिएंट्स और पैकेजिंग टेरियल की कीमतों में 200% से 300% तक की रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि दर्ज की गई है। दवा की शीशियों (ग्लास), एल्युमिनियम और पीवीसी के दामों में उछाल ने दवाओं की फाइनल पैकिंग को भी महंगा कर दिया है।

हिमाचल ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन की गुहार

हिमाचल ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (HDMA) ने इस विकट स्थिति पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया है। प्रदेश अध्यक्ष राजेश गुप्ता के नेतृत्व में केंद्र सरकार को एक आपातकालीन ज्ञापन सौंपा गया है। एसोसिएशन का तर्क है कि बढ़ती लागत के कारण पुराने रेट पर चल रहे प्रोडक्शन कॉन्ट्रैक्ट्स अब घाटे का सौदा बन गए हैं।

कीमतों में अस्थिरता के कारण कंपनियां सरकारी टेंडरों की आपूर्ति पूरी करने में असमर्थ हो रही हैं, जिससे 'डिफॉल्ट' होने का डर है। यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो कई इकाइयां तालेबंदी को मजबूर होंगी, जिससे हजारों श्रमिकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा और मजदूरों का पलायन शुरू हो सकता है।

समाधान के लिए प्रमुख मांगें

औद्योगिक संगठनों ने भारत सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है ताकि आम आदमी तक पहुंचने वाली दवाइयां महंगी न हों। प्रमुख एपीआई और पैकेजिंग सामग्री की अधिकतम कीमतों को सरकार द्वारा नियंत्रित किया जाए।

बाजार में पैदा की जा रही कच्चे माल की 'कृत्रिम कमी' और कालाबाजारी को रोकने के लिए सख्त निगरानी तंत्र बनाया जाए। एमएसएमई सेक्टर को इस संकट से उबारने के लिए विशेष आर्थिक सहयोग या सब्सिडी पर विचार हो।

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