आखिर श्री आदि हिमानी चामुंडा मंदिर परिसर में पहुंचा पेयजल

Edited By Jinesh Kumar, Updated: 28 Sep, 2020 12:58 PM

after all drinking water reached shri adi himani chamunda temple complex

नवरात्र से पूर्व लगभग 10000 फुट की ऊंचाई पर स्थित श्री आदि हिमानी चामुंडा मंदिर परिसर में पेयजल पहुंच गया। मंदिर परिसर तक पानी को लाने के प्रयास लंबे समय पश्चात आखिर फलीभूत हुए हैं। धौलाधार के ग्लेशियर पॉइंट से पानी को मंदिर तक पहुंचाने की कवायद की...

पालमपुर (भृगु): नवरात्र से पूर्व लगभग 10000 फुट की ऊंचाई पर स्थित श्री आदि हिमानी चामुंडा मंदिर परिसर में पेयजल पहुंच गया। मंदिर परिसर तक पानी को लाने के प्रयास लंबे समय पश्चात आखिर फलीभूत हुए हैं। धौलाधार के ग्लेशियर पॉइंट से पानी को मंदिर तक पहुंचाने की कवायद की जा रही थी। इस हेतु मंदिर परिसर के समकक्ष खड़ी ऊंची चोटी ओबरा पॉइंट से पानी को पाइपों के माध्यम से मंदिर तक पहुंचाने की कसरत आरंभ की थी। पाईप बिछाने का कार्य लगभग गत वर्ष ही पूरा कर लिया गया था परंतु ग्रेविटी न बन पाने के कारण तथा पाइपों को कुछ स्थान पर पहुंची क्षति के कारण पानी मंदिर परिसर तक नहीं पहुंच पा रहा था। लगभग 32 लाख की इस योजना को लेकर कुछ समय पूर्व भी उपायुक्त कांगड़ा ने जल शक्ति विभाग को कार्य को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए थे। जिसके पश्चात जल शक्ति विभाग के अधिकारियों की एक टीम ने 9 सितम्बर को मंदिर परिसर का दौरा कर सारी स्थिति की समीक्षा की थी। ऐसे में अब मंदिर परिसर तक पानी पहुंच गया है। नवरात्रों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर पहुंचते हैं। इन दिनों की श्रद्धालुओं का मंदिर परिसर पहुंचने का क्रम निरंतर जारी है। वहीं मंदिर में पुजारी तथा अन्य स्टाफ भी इन दिनों श्री आदि हिमानी चामुंडा मंदिर परिसर में ही है।

लगभग एक किलोमीटर ढोना पड़ता था पानी
इससे पहले मंदिर परिसर तक पानी की उपलब्धता को सुनिश्चित बनाना सुगम नहीं था। लगभग मंदिर से 1 किलोमीटर नीचे बंगाल वां से पानी को पीने तथा अन्य कार्यों के लिए ढोया जाता था। इस हेतु आने जाने में लगभग पौना घंटा समय लगता था तथा सीधी चढ़ाई होने के कारण कम मात्रा में ही पानी एक व्यक्ति एक समय पर ढो पाता था। मंदिर परिसर में निर्माण कार्य के लिए भी पानी की ढुलाई बंगाल वां से ही की जाती थी वहीं मंदिर में मां के श्रृंगार तथा स्नान आदि के लिए भी पानी की उपलब्धता इसी वां से की जाती थी। ऐसे में लगभग 7 किलोमीटर लंबी पाइप से पानी पहुंचने से मंदिर परिसर में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को भी सुगमता होगी।

पहले भी हो चुका है प्रयास
कुछ वर्ष पूर्व युवाओं के एक दल ने भी मंदिर परिसर तक पानी पहुंचाने में सफलता प्राप्त की थी। कंड बग्याड़ा के इन युवाओं ने भी ग्लेशियर प्वाइंट से प्लास्टिक के पाइप पर बिछाई थी, ताकि मंदिर परिसर तक पानी को पहुंचाया जा सके। इन युवाओं का यह भागीरथी प्रयास सफल भी रहा था परंतु बाद में यह पाइप अनेक स्थानों से क्षतिग्रस्त हो गई। जिस कारण स्थाई रूप से मंदिर परिसर तक पानी पहुंचाने का प्रयास आरंभ किए जाने लगे।

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