इकलौते बेटे का बलिदान: अक्षित शर्मा अमर रहे के नारों से गूंज उठा गांव, नम आँखों से दी आखिरी विदाई

Edited By Jyoti M, Updated: 11 Mar, 2026 03:00 PM

kangra akshit sharma was given a tearful farewell

सेना की वर्दी पहनने का जुनून और आंखों में देश की रक्षा का सपना लेकर निकला उस्तेहड़ गांव का जवान अक्षित शर्मा अब केवल यादों में शेष है। जम्मू के अखनूर सेक्टर में कमांडो ट्रेनिंग की कठोर चुनौतियों का सामना करते हुए, 26 वर्षीय इस जांबाज ने तवी नदी के...

हिमाचल डेस्क। सेना की वर्दी पहनने का जुनून और आंखों में देश की रक्षा का सपना लेकर निकला उस्तेहड़ गांव का जवान अक्षित शर्मा अब केवल यादों में शेष है। जम्मू के अखनूर सेक्टर में कमांडो ट्रेनिंग की कठोर चुनौतियों का सामना करते हुए, 26 वर्षीय इस जांबाज ने तवी नदी के वेग के बीच अपनी अंतिम सांस ली। 09 पंजाब रेजिमेंट का यह युवा योद्धा न केवल अपने परिवार का इकलौता सहारा था, बल्कि पूरे क्षेत्र की उम्मीदों का केंद्र भी था।

प्रशिक्षण के दौरान हुआ हादसा

मिली जानकारी के मुताबिक, जम्मू के अखनूर में भारतीय सेना का विशेष कमांडो अभ्यास चल रहा था। एक घातक योद्धा बनने की ट्रेनिंग के दौरान तवी नदी को पार करते समय अक्षित अचानक हादसे का शिकार हो गए। सेना की रेस्क्यू टीम ने उन्हें बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। लंबे सर्च ऑपरेशन के बाद जब उनका पार्थिव शरीर बरामद हुआ, तो सेना और उनके गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई

जब तिरंगे में लिपटा अक्षित का शरीर उनके पैतृक गांव उस्तेहड़ पहुंचा, तो हर आंख नम थी और हर दिल में अपने वीर के लिए सम्मान था। प्रशासन, सेना के जवानों और हजारों ग्रामीणों की उपस्थिति में उन्हें पूरे सैन्य सम्मान के साथ विदा किया गया। श्मशान घाट 'भारत माता की जय' और 'अक्षित शर्मा अमर रहे' के नारों से गूंज उठा।

गमगीन माहौल में श्रद्धासुमन

इस दुखद घड़ी में राजनेताओं और अधिकारियों ने परिवार को ढांढस बंधाया। राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा ने इस क्षति को अपूरणीय बताते हुए कहा कि देश ने एक होनहार और समर्पित बेटा खो दिया है। विधायक किशोरी लाल ने परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि अक्षित का बलिदान और उनकी वीरता पर पूरे हिमाचल को गर्व है और सरकार इस कठिन समय में परिवार के साथ खड़ी है। एसडीएम संकल्प गौतम सहित कई प्रशासनिक अधिकारियों ने भी शहीद को पुष्पांजलि अर्पित की।

सूना हो गया आंगन

अक्षित की कहानी इसलिए भी अधिक मर्मस्पर्शी है क्योंकि वे अपने माता-पिता विजय कुमार और रेणु अवस्थी की इकलौती संतान थे। अभी कुछ ही दिन पहले वे छुट्टियों का आनंद लेकर ड्यूटी पर वापस लौटे थे। माता-पिता ने जिस बेटे को देश की रक्षा के लिए तिलक लगाकर विदा किया था, उन्हें क्या पता था कि वह अब तिरंगे में लिपटकर ही घर वापस आएगा।

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