Una: गगरेट के अंदौरा में आग का तांडव, पलक झपकते ही राख के ढेर में बदले 45 आशियाने

Edited By Vijay, Updated: 26 Dec, 2025 04:59 PM

45 shanties burnt to ashes

ऊना जिले के विधानसभा क्षेत्र गगरेट के तहत आने वाले अंदौरा गांव में वीरवार रात्रि एक बड़ा हादसा पेश आया। यहां सोमभद्रा नदी के किनारे बाहरी राज्यों से आए मजदूरों की बस्ती में अचानक आग भड़क उठी।

गगरेट (बृज): ऊना जिले के विधानसभा क्षेत्र गगरेट के तहत आने वाले अंदौरा गांव में वीरवार रात्रि एक बड़ा हादसा पेश आया। यहां सोमभद्रा नदी के किनारे बाहरी राज्यों से आए मजदूरों की बस्ती में अचानक आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे करीब 45 झुग्गियां जलकर पूरी तरह राख हो गईं। राहत की बात यह रही कि इस भयानक अग्निकांड में सभी मजदूरों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे कोई जानी नुक्सान नहीं हुआ।

रात के अंधेरे में मची चीख-पुकार
घटना रात करीब 10:30 बजे की है, जब मजदूर परिवार दिनभर की थकान के बाद आराम कर रहे थे। अचानक झुग्गियों में आग लगी और लपटें उठने लगीं। जब तक कोई कुछ समझ पाता, आग ने पूरी बस्ती को घेर लिया। मौके पर भारी चीख-पुकार मच गई। हालांकि, सभी परिवारों के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया, लेकिन उनकी मेहनत की कमाई और गृहस्थी का सामान नहीं बचाया जा सका। मजदूरों का घरेलू सामान, बिस्तर, कपड़े, अनाज और जमा पूंजी (नकदी) सब कुछ जलकर राख हो गया।

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प्रशासन ने दिखाई मानवता, रैन बसेरे में किया शिफ्ट
अग्निकांड की सूचना मिलते ही एसडीएम गगरेट सौमिल गौतम और तहसीलदार कुलताज सिंह दल-बल के साथ तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए सभी पीड़ित परिवारों का रेस्क्यू करवाया। एसडीएम और तहसीलदार ने मानवता का परिचय देते हुए नगर पंचायत गगरेट से संपर्क साधा और बेघर हुए सभी मजदूर परिवारों के लिए रात गुजारने का उचित प्रबंध गगरेट स्थित रैन बसेरे में करवाया।

सवाल: प्रतिबंध के बावजूद कैसे बसी बस्ती?
एसडीएम सौमिल गौतम के अनुसार आग लगने के स्पष्ट कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। गौरतलब है कि जिस क्षेत्र में आग लगी, वह तकनीकी रूप से उपमंडल अम्ब के अधीन आता है, लेकिन गगरेट प्रशासन ने मानवता के आधार पर रात को ही राहत कार्य शुरू कर दिए। वहीं, इस घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं कि जिला प्रशासन द्वारा खड़पोश झुग्गियां बनाने पर लगाए गए प्रतिबंध के बावजूद, आखिर इतने बड़े पैमाने पर मजदूर परिवार यहां झुग्गियां बनाकर कैसे रह रहे थे।

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