Edited By Swati Sharma, Updated: 18 Mar, 2026 07:00 PM

Shimla News: हिमाचल प्रदेश में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत काम संतोषजनक नहीं पाये जाने पर 138 ठेकेदारों पर ब्लैकलिस्ट होने का खतरा मंडरा रहा है। एक केन्द्रीकृत प्रदर्शन मूल्यांकन में यह निष्कर्ष सामने आया है कि इस कार्य की गुणवत्ता उपयुक्त...
Shimla News: हिमाचल प्रदेश में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत काम संतोषजनक नहीं पाये जाने पर 138 ठेकेदारों पर ब्लैकलिस्ट होने का खतरा मंडरा रहा है। एक केन्द्रीकृत प्रदर्शन मूल्यांकन में यह निष्कर्ष सामने आया है कि इस कार्य की गुणवत्ता उपयुक्त मानकों के अनुरूप नहीं थी। अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राज्य में योजना के पहले तीन चरणों में लगे 182 ठेकेदारों की रैंकिंग की है। इनमें से केवल 44 ठेकेदार ही गुणवत्ता और काम पूरा करने के मानकों पर खरे उतरे, जबकि बाकी 138 ठेकेदारों को घटिया काम, देरी और तय नियमों का पालन न करने के लिए चिह्नित किया गया। यह रैंकिंग भारत सरकार के एक पोर्टल के ज़रिए की गई है, जिसमें ठेकेदार-वार डेटा, निरीक्षण रिपोर्ट और कमियों का रिकॉर्ड मौजूद है।
खराब रैंकिंग वाले ठेकेदारों पर लग सकती हैं पाबंदियां
अधिकारियों ने बताया कि खराब रैंकिंग वाले ठेकेदारों पर पाबंदियां लग सकती हैं और उन्हें ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है। इसका मतलब यह होगा कि वे ग्रामीण सड़कों की इस मुख्य योजना के चौथे चरण के तहत कोई भी काम हासिल नहीं कर पाएंगे। सड़कों की गुणवत्ता को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच, हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने साफ कर दिया है कि आने वाले चरण में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार ने राज्य में लगभग 1,500 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों के निर्माण के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना चार के तहत करीब 2,300 करोड़ रुपये मंज़ूर किए हैं। उन्होंने कहा कि काम के आवंटन के लिए सख्त शर्तें लागू होंगी। उन्होंने कहा कि किसी भी ठेकेदार को सात से ज़्यादा परियोजनाएं या 100 करोड़ रुपये से ज़्यादा का काम नहीं दिया जाएगा। इस कदम का मकसद पारदर्शिता सुनिश्चित करना और गुणवत्ता के मानकों को बनाए रखना है। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि नये काम का आवंटन केवल उन्हीं ठेकेदारों को दिया जाएगा, जिन्होंने अपने पिछले कामों का 70 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सा संतोषजनक ढंग से पूरा किया हो।
पिछले चरणों में किए गए कामों के निरीक्षण में सामने आई थीं कई कमियां
अधिकारियों ने बताया कि पिछले चरणों में किए गए कामों के निरीक्षण में कई कमियां सामने आई थीं। इनमें निर्माण की खराब गुणवत्ता, काम पूरा करने में देरी और तकनीकी मानकों का पालन न करना शामिल है। जिन ठेकेदारों में बार-बार कमियां पाई गईं, उन्हें समीक्षा के दायरे में रखा गया, जिसका उनकी रैंकिंग पर बुरा असर पड़ा। राज्य के लोक निर्माण विभाग ने ग्राम सड़क योजना के कामों के लिए टेंडर प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी है और बोलियां आमंत्रित की जा रही हैं। हालांकि, अंतिम आवंटन केंद्रीय मंत्रालय द्वारा जांची गई निष्पादन रिपोर्ट के आधार पर होने की उम्मीद है, जिससे प्रोजेक्ट को पूरा करने में जवाबदेही और मज़बूत होगी। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हिमाचल प्रदेश अभी भी पिछले साल मॉनसून आपदा के दौरान सड़कों, पुलों, रिटेनिंग दीवारों और अन्य बुनियादी ढांचे को हुए बड़े पैमाने पर नुकसान से उबर रहा है। इस आपदा ने ग्राम सड़क योजना की सड़कों और चार-लेन वाले हिस्सों सहित कई परियोजनाओं में निर्माण की गुणवत्ता में मौजूद कमियों को उजागर कर दिया था।
यह मुद्दा ऐसे समय में भी सामने आया है जब राज्य सरकार ठेकेदारों के बकाया भुगतानों को लेकर दबाव में है। सरकार ने हाल ही में बकाया बिलों का भुगतान करने के लिए राज्य के खजाने से 500 करोड़ रुपये जारी करने का फैसला किया था। इस ताज़ा कदम को ग्रामीण सड़क निर्माण में गुणवत्ता नियंत्रण को सख्त करने और यह सुनिश्चित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है कि इस पहाड़ी राज्य में यातायात से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाएं केवल विश्वसनीय एजेंसियों को ही सौंपी जाएं।
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