सायर उत्सव की तैयारियों में जुटे ग्रामीण, होगी देवी-देवताओं की विशेष पूजा

Edited By Simpy Khanna, Updated: 16 Sep, 2019 03:44 PM

villagers busy in preparations for the sare festival

हिमाचल में भादों का महीना समाप्त होते ही असूज या आश्विन महीना शुरू होता है। इस भादों महीने की सक्रांति को सायर उत्सव मनाया जाता है। यह उत्सव हिमाचल के सीमित जिलों में ही मनाया जाता है।

कुल्लू (मनमिंदर) : हिमाचल में भादों का महीना समाप्त होते ही असूज या आश्विन महीना शुरू होता है। इस भादों महीने की सक्रांति को सायर उत्सव मनाया जाता है। यह उत्सव हिमाचल के सीमित जिलों में ही मनाया जाता है। भादों महीने में मायके गई नवेली दुल्हनें भी इस महीने अपने ससुराल वापिस आ जाती हैं। कुल्लू में सायर उत्सव मंगलवाल को मनाया जा रहा है और ग्रामीण इस उत्सव की तैयारियों में जोर-शोर से जुट गए हैं।
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वहीं जिला भर के मंदिरों में विशेष रूप से देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना भी की जाएगी। सायर संक्रांति के साथ ही उझी घाटी हलाण, मणिकर्ण घाटी के पड़ेई, धारगण, व्यासर, तांदला, शांघड़ और बागन आदि स्थानों पर शौयरी मेलों का भी आगाज होगा। वही, सायर पर्व को लेकर बच्चों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। शहरी क्षेत्रों में भी लोगों ने सायर पर्व की परंपरा का निर्वहन किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रो में घर आए मेहमानों को पारंपरिक व्यंजन सिड्डू, भल्ले और देसी घी के पकवान परोसे जाएंगे। घाटीवासी लालचंद ठाकुर, सुतीश, कमल, चंदेराम, राजेश, मोहन, महेश, चुन्नी लाल, कैलाश, सुरेश, कोमल ने कहा कि सायर पर्व के अवसर पर घर-घर जाकर बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी संस्कृति को संजोए रखने के लिए इन परंपराओं को निभाना सायर पर्व प्रमुख त्यौहारों में से एक है। सात दिनों तक गांवों में जूब देने व मेलों का आयोजन चलता रहेगा। जिला देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष जयचंद ठाकुर ने कहा कि सायरी साजा पर्व को कुल्लू में धूमधाम से मनाया जाएगा। इस पर्व के मौके पर देवी-देवताओं की विशेष पूजा अर्चना की जाएगी और देवी-देवताओं को विभिन्न प्रकार के भोग भी लगाए जाएंगे।

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