Edited By Jyoti M, Updated: 17 Mar, 2026 05:32 PM

हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य परिवहन प्राधिकरण (STA) और क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (RTA) के अध्यक्षों को हटाने के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कानूनी टीम को इस मामले में अपील दायर...
हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) और क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) के अध्यक्षों को हटाने के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कानूनी टीम को इस मामले में अपील दायर करने के निर्देश दे दिए हैं।
मामला क्या है?
हाल ही में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दो वरिष्ठ पदों पर नियुक्तियों को रद्द कर दिया था। इसमें अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) जिन्हें STA का अध्यक्ष बनाया गया था और परिवहन निदेशक जिन्हें RTA का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, शामिल हैं। अदालत ने मई 2023 की उस अधिसूचना को भी खारिज कर दिया, जिसके तहत ये नियुक्तियां की गई थीं। कोर्ट का मानना है कि ये अधिकारी हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के बोर्ड में शामिल हैं, इसलिए वे परिवहन प्राधिकरणों के निष्पक्ष अध्यक्ष नहीं हो सकते।
कोर्ट ने क्यों हटाया?
अदालत ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 का हवाला देते हुए कहा कि कानून के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जिसका किसी परिवहन सरकारी उपक्रम (जैसे HRTC) में वित्तीय हित या सीधा जुड़ाव हो, वह STA या RTA का अध्यक्ष नहीं बन सकता। चूंकि ये अधिकारी HRTC के प्रबंधन से जुड़े हैं, इसलिए निजी बस ऑप्रेटरों के साथ प्रतिस्पर्धा के मामलों में उनके फैसलों में हितों का टकराव हो सकता है।
सरकार को 31 मार्च तक नियुक्त करने का दिया आदेश
हाईकोर्ट ने सरकार को 31 मार्च तक इन प्राधिकरणों का दोबारा गठन करने और निष्पक्ष व्यक्तियों को नियुक्त करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ किया है कि इन अधिकारियों द्वारा अब तक लिए गए फैसले मान्य रहेंगे ताकि प्रशासनिक काम न रुके। नई नियुक्तियों तक वर्तमान सदस्य केवल जरूरी काम ही देख पाएंगे, वे रूट परमिट जारी करने जैसे बड़े नीतिगत फैसले नहीं ले सकेंगे।
आनंद मोदगिल की याचिका पर सामने आया मामला
यह मामला आनंद मोदगिल की याचिका पर सामने आया था। उन्होंने तर्क दिया था कि सरकारी बस सेवा (HRTC) और निजी बस ऑप्रेटरों के बीच निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इन अधिकारियों का अध्यक्ष पद पर रहना कानूनन गलत है।