चिट्टा तस्करों को सजा दिलवाने के लिए जिला प्रशासन ने किया महामंथन

Edited By Jyoti M, Updated: 19 Jan, 2026 09:42 AM

the district administration held a major brainstorming session

जिला प्रशासन शिमला द्वारा एनडीपीएस एक्ट 1985, एससी एसटी एक्ट 1989 और पॉक्सो एक्ट 2012 को लेकर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला आज होटल होलीडे होम में आयोजित की गई।

शिमला। जिला प्रशासन शिमला द्वारा एनडीपीएस एक्ट 1985, एससी एसटी एक्ट 1989 और पॉक्सो एक्ट 2012 को लेकर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला आज होटल होलीडे होम में आयोजित की गई। पहली बार जिला में इस तरह की समावेशी कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस महामंथन में चिट्टा तस्करों को सजा दिलवाने के लिए विशेष रणनीति की विस्तृत चर्चा की गई।

इस महामंथन में जिला के सभी एसडीएम, डीएसपी, जिला न्यायवादी, अभियोजन अधिकारी, सहायक न्यायवादी, स्वास्थ्य विभाग और जिला के सभी एसएचओ मौजूद रहे। प्रदेश सरकार ने हिमाचल प्रदेश को चिट्टा मुक्त बनाने का संकल्प लिया है। ऐसे में नशा तस्करों को सजा कम से कम समय दिलवाने की दिशा में प्रभावी तरीके से कार्य किया जा रहा है।

उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि एनडीपीएस एक्ट 1985, एससी एसटी एक्ट 1989 और पॉक्सो एक्ट 2012 के तहत दर्ज मामलों में लोगों को इंसाफ दिलवाने के लिए सभी हितधारकों को कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देवभूमि है। ऐसे में देवी-देवताओं की धरती पर अगर लोगों को इंसाफ दिलवाने में हम सफल नहीं हो पा रहे हैं तो हमें अपनी कार्यप्रणाली में काफी सुधार करने की आवश्यकता है।

हमने स्वयं अपनी जॉब का चयन किया है। अगर फिर भी हम कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन नहीं कर रहे है तो फिर समाज को न्याय दिलवाने में हम काफी पीछे रह रहे है। हमारे मामले कोर्ट में जब पहुंचते है तो दोषसिद्धि हो ही नहीं पाती है। पीड़ित लोगों को न्याय मिल नहीं पाता है। ऐसे में लोगों का प्रशासन और न्याय के प्रति दृष्टिकोण काफी बदल जाता है। लेकिन जिस पीड़ित के साथ घटना घटी होती है अगर उसे न्याय मिल जाए तो उसके चेहरे पर जो मुस्कान आती है वो हमारे लिए प्रेरणादायक होती है। उन्होंने कहा कि जब मामलों में दोषमुक्ति दर अधिक होगी तो लोगों में डर होगा ही नहीं और वह अधिक से अधिक अपराध करने की दिशा में बढ़ते रहते है। ऐसे लोग बार-बार अपराध करते है। इसलिए लोगों को कानून का डर होना जरूरी है ताकि उनको ध्यान रहे कि गलत करेंगे तो सजा कोर्ट से मिलेगी।

उन्होंने कहा कि पुलिस मामलों की जांच में फाउंडेशन को मजबूत करना चाहिए तभी तो कोर्ट में केस टिकेगा और आरोपी के खिलाफ आरोप सिद्ध हो पाएंगे। इस तरह की कार्यशाला का उद्देश्य केवल लोगों को इंसाफ दिलवाने के जिन एजेंसियों की जिम्मेदारी है, उन सभी सभी को एकजुट होकर सही दिशा में कार्य कर सके। इस दौरान पुलिस, स्वास्थ्य, कानून विभाग और सामाजिक अधिकारिता विभाग की फील्ड चुनौतियों को लेकर विस्तृत चर्चा इसमें की गई। सभी विभाग एकजुट होकर भविष्य के लिए रणनीति बनाएंगे ताकि लोगों को न्याय मिल सके।

जांच अधिकारी निष्पक्ष और तथ्यों पर करें जांच - संजीव कुमार गांधी

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार गांधी ने कहा कि जिला में एनडीपीएस एक्ट 1985, एससी एसटी एक्ट 1989 और पॉक्सो एक्ट 2012 के तहत मामले दर्ज होते है लेकिन कोर्ट में जब यह मामले ट्रायल के लिए पहुंचते है तो अधिकांश मामलों में दोषमुक्ति की दर काफी ज्यादा होती है। इसलिए पुलिस विभाग व अन्य हितधारकों के लिए यह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि पिछले 27 वर्ष पुलिस विभाग में कार्य करते हुए जितना अनुभव किया है उसके मुताबिक मामलों की जांच के समय ज्यादा सोचने का समय नहीं होता है। बल्कि हमें तुरंत कार्रवाई और जांच को पूर्ण करना होता है।

मामलों की जांच में आजादी, निष्पक्षता, समावेशन, सच्चाई पर आधारित तथ्य को ध्यान में रखकर कार्य करना होता है। जब जांच अधिकारी ही पक्षपाती हो जाते है तो जांच प्रभावित हो जाती है। जांच अधिकारी किसी भी मामले में पहले से निर्णय घोषित करके मामले की जांच को आगे बढ़ाने की दिशा में न बढ़े। उन्होंने कहा कि जरूरी नहीं एफआईआर में लगे आरोपों को साबित करने में ही लगे रहें क्योंकि बहुत से मामलों में आरोप तथ्यों से परे होते हैं। ऐसे में जांच अधिकारी एफआईआर में दर्ज आरोपों को साबित करने के चक्कर में सही तथ्यों को पीछे छोड़ देते है। उन्होंने कहा कि जांच अधिकारी को आरोपों की सत्यता की जांच करने के लिए कार्य करना चाहिए तभी कोर्ट में चालान में सारे तथ्य सही साबित हो पाएंगे।

एनडीपीएस एक्ट के तहत पिछले पांच वर्षों में 26 फीसदी दोषसिद्धि दर

जिला न्यायवादी सुधीर शर्मा ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि पोक्सो अधिनियम (POCSO Act), जिसका पूरा नाम 'यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012' (Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012) है। इस एक्ट के तहत जिला में 2021 में कुल चार मामले थे और चारों में आरोपी दोषमुक्त हो गए जबकि वर्ष 2022 में 18 मामलो में दोषमुक्त और 15 मामलों में सजा हुई। ऐसे में 83 फीसदी दर दोषसिद्धि रही है।

वर्ष 2023 में 13 मामलों में दोषमुक्त और 12 मामलों में दोषसिद्धि हुई है। ऐसे में दर 92 फीसदी रही। वर्ष 2024 में 32 मामलों में दोषमुक्ति और 16 मामलों में दोषसिद्धि हो पाई। वर्ष 2025 में 22 मामलों में दोषमुक्ति और 6 मामलों में दोषसिद्धि हो पाई। ऐसे में दर 27 फीसदी दर्ज की गई। वर्ष 2021 से 2025 तक कुल 138 मामले कोर्ट पहुंचे। इनमें 49 मामलों में ही दोषसिद्धि हुई जबकि 89 मामलों में दोषमुक्त हो गए। पिछले पांच वर्षों की दोषसिद्धि दर 35 फीसदी पाई गई है।

जिला न्यायवादी ने कहा कि 2021 से 2025 तक 391 मामले एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज हुए है। इनमें से 98 मामलों में दोषसिद्धि हो पाई है जबकि 293 मामलों में दोषमुक्ति हो चुकी है। ऐसे में दोषसिद्धि दर 26 फीसदी रही है। वर्ष 2021 में 15 मामलों में दोषमुक्ति और पांच मामलों में दोषसिद्धि हुई। वर्ष 2022 में 20 मामलों में दोषमुक्ति और 9 मामलों में दोषसिद्धि हुई। वर्ष 2023 में 70 मामलों में दोषमुक्ति और 21 मामलों में दोषसिद्धि हुई। वर्ष 2024 में 82 मामलों में दोषमुक्ति और 25 मामलों में दोषसिद्धि हुई। वर्ष 2025 में 106 मामलों में दोषमुक्ति और 38 मामलों  दोषसिद्धि हुई है।

कार्यशाला में विशेष व्याख्यानों का आयोजन

एएसपी मेहर पंवार ने पॉक्सो एक्ट 2012 के प्रावधानों को लेकर कार्यशाला में जानकारी रखी। डॉ विवेक सहजपाल सहायक निदेशक, फॉरेंसिक सर्विस निदेशालय ने डीएनए प्रोफाइलिंग को लेकर विस्तृत जानकारी रखी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ यशवंत रांटा ने एमएलसी और पोस्टमार्टम के बारे में विस्तृत जानकारी रखी और जांच अधिकारियों के सवालों के जवाब भी दिए।  

आईजीएमसी के उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ प्रवीण एस भाटिया ने कहा कि चिट्टा की चपेट में लड़के और लड़कियां की संख्या बढ़ती जा रही है। सिरिंज के इस्तेमाल और नशे की डोज के आड़ में लड़कियों का शारीरिक शोषण हो रहा है। अब कई लड़के सेनेटरी पैड को उबालकर उसका पानी नशे के रूप में इस्तेमाल कर रहे है।

 

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