समाजसेवी का चोला, ब्लैकमेलिंग का धंधा; पुलिस ने दबोचा RTI का दुरुपयोग करने वाला 73 वर्षीय बुजुर्ग; फर्जीवाड़े से झटके सरकारी टेंडर

Edited By Swati Sharma, Updated: 11 Feb, 2026 01:22 PM

solan police arrested a 73 year old man for misusing rti

Solan News: हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र परवाणू से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस ने 73 वर्षीय सतीश बेरी को गिरफ्तार किया है, जो कि एक समाजसेवी और आरटीआई कार्यकर्ता था। आरोप है कि वह आरटीआई को हथियार बनाकर अधिकारियों को ब्लैकमेल करता...

Solan News: हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र परवाणू से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस ने 73 वर्षीय सतीश बेरी को गिरफ्तार किया है, जो कि एक समाजसेवी और आरटीआई कार्यकर्ता था। आरोप है कि वह आरटीआई को हथियार बनाकर अधिकारियों को ब्लैकमेल करता था और फर्जी दस्तावेजों के जरिए करोड़ों के सरकारी ठेके हथियाता था। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) की जांच के बाद पुलिस ने 73 वर्षीय सतीश बेरी को गिरफ्तार किया है।

RTI को बनाया वसूली का औजार

शिकायतकर्ता राजाराम भारती के अनुसार, आरोपी एक संगठित गिरोह चला रहा था। यह गिरोह विभिन्न सरकारी विभागों में बार-बार आरटीआई लगाकर अधिकारियों पर मानसिक दबाव बनाता था। इसके बाद, जांच रुकवाने या शिकायत वापस लेने के बदले अधिकारियों को डरा-धमका कर अपने और अपने बेटे के पक्ष में टेंडर और सरकारी कार्य आवंटित करवाए जाते थे। शिकायत में आरोप लगाया है कि सतीश बेरी स्वयं बिजली विभाग का ठेकेदार है तथा उसका पुत्र भी नगर परिषद परवाणू में सिविल वर्क का ठेकेदार है।

नगर परिषद में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा

अन्वेषण के दौरान नगर परिषद परवाणू के रिकॉर्ड ने भ्रष्टाचार की कई परतें खोली हैं। सेक्टर-4 हिमुडा (HIMUDA) फ्लैट्स की टेस्ट रिपोर्ट मामले में आरोपी ने भारी फर्जीवाड़ा किया। जांच में यह सामने आया है कि 11 जून 2020 को फर्जी तरीके से टेंडर लिया गया, उसी दिन 83 फ्लैटों की रिपोर्ट तैयार हुई और उसी दिन बिल भी जमा कर दिया गया। कार्य आवंटन के लिए जरूरी तीनों कोटेशन जाली पाए गए। नियमानुसार हिमुडा द्वारा नियुक्त ठेकेदार यह रिपोर्ट निशुल्क देता है, लेकिन आरोपी ने कागजों की कूटरचना कर नगर परिषद से मोटी रकम ऐंठ ली।

IPC की गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई

पुलिस ने दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ और धोखाधड़ी के पुख्ता सबूत मिलने पर मामले में धारा 467 IPC (महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जालसाजी) को भी शामिल कर लिया है। मंगलवार को आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सहयोगियों और विभागीय मिलीभगत की भी गहराई से जांच कर रही है।

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