Shimla: शिक्षा का कांग्रेसीकरण करने की बजाय रोजगारोन्मुखी करे सरकार : जयराम

Edited By Kuldeep, Updated: 23 Nov, 2025 06:02 PM

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पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा है कि सरकार की मंशा प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को पतन की तरफ ले जाने और उसके कांग्रेसीकरण करने की है।

शिमला (ब्यूरो): पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा है कि सरकार की मंशा प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को पतन की तरफ ले जाने और उसके कांग्रेसीकरण करने की है। यदि मुख्यमंत्री और सुख की सरकार शिक्षा के क्षेत्र में कुछ कर सकती है तो वह शिक्षा काे रोजगारोन्मुखी बनाए तो बेहतर होगा। यहां से जारी बयान में उन्होंने कहा कि शिक्षा का कांग्रेसीकरण हम नहीं करने देंगे। सत्ता में आने के बाद से 3 साल में ही लगभग 2000 शिक्षण संस्थानों पर ताला लगाने वाली सरकार के मुंह से शिक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण की बात निकलनी चाहिए लेकिन जिम्मेदार लोग शिक्षा के कांग्रेसीकरण की बात करते हैं, जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।

प्रदेश शिक्षा बोर्ड प्रदेश के छात्रों के शैक्षणिक योग्यता को परखने का माध्यम है, हिमाचल के नेताओं के अपनी ब्रांडिंग और आलाकमान की चाटुकारिता करने का नहीं। दुर्भाग्यवश यह पुस्तिका भी राजकीय प्रिंटिंग प्रैस के अलावा अन्यत्र जगह से प्रकाशित है। उन्होंने कहा कि बाल दिवस के अवसर पर हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड द्वारा एक पुस्तिका प्रकाशित करवाई गई। उस पुस्तिका को भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के बारे में लिखे जाने का दावा किया गया है। इस पुस्तक को देखकर लगता है कि साहित्यिक नैतिकता को ताक पर रख दिया है। महान विचारकों के कथन को क्रैडिट तक नहीं दिया है। अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी जी का नाम पूरी पुस्तक में नहीं है।

राष्ट्रीय एकता के प्रतीक लौह पुरुष सरदार पटेल का जिक्र भी नहीं है, जिनके बिना आधुनिक भारत का जिक्र भी बेमानी है। पुस्तिका या उसके चैप्टर के लेखक का नाम तक नहीं लिखा गया है। उन्होंने कहा कि हैरानी की बात यह है कि 72 पेज की उस पुस्तिका में 40 पेज कांग्रेस के नेताओं की शुभकामना संदेश से भरे हुए हैं। उससे भी हैरानी की बात यह है कि इस पूरी पुस्तिका में प्रदेश के शिक्षा मंत्री का संदेश कहीं नजर नहीं आ रहा है। इस पुस्तिका में शिक्षा विभाग के सचिव, निदेशक आदि के भी बधाई संदेश को स्थान नहीं मिल पाया है लेकिन कांग्रेस के महासचिव, कांग्रेस आला कमान के खासमखास नेताओं के बधाई संदेश प्रमुखता से प्रकाशित हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हिमाचल प्रदेश के पैसे से सरकार में बैठे कुछ लोग अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने की जुगत लगा रहे हैं? गनीमत यह है कि पुस्तिका में कांग्रेस ने चुनाव चिह्न नहीं डाला। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के संसाधन जोकि शिक्षा के बेहतरी के लिए खर्च होने चाहिए थे, वे कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं के प्रशंसा में खर्च हो रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के शिक्षकों को परीक्षा पुस्तिका के मूल्यांकन का पैसा भी 2 साल से नहीं मिला है, एग्जाम ड्यूटी का भत्ता भी 2 साल से ज्यादा समय से लंबित है।

हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड के संसाधन प्रदेश के शिक्षकों और छात्रों की बेहतरी के लिए खर्च होने चाहिए, न कि कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी और सरकार व पार्टी नेताओं का करीबी साबित करने के लिए। शिक्षा व्यवस्था के लिए अगर सरकार कुछ करना चाहती है तो वह केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति को अक्षरश: और प्रभावी तरीके से लागू करे, जिससे शिक्षा और ज्यादा रोजगारोन्मुख हो सके। अगर सरकार की मंशा ठीक है तो कौशल विकास के जिन कार्यक्रमों को सरकार ने 2 साल से ठप्प रखा है, उन कार्यक्रमों को पुन: शुरू करे और प्रभावी तौर पर उसका क्रियान्वयन करे। जिससे प्रदेश में कौशल विकास के क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा युवा सीखें और देश और प्रदेश हित के काम कर सकें।

प्रदेश में बिगड़ी कानून व्यवस्था, आम लोग हो रहे परेशान : सत्ती
शिमला, 23 नवम्बर (हैडली): भाजपा के पूर्व अध्यक्ष एवं विधायक सतपाल सत्ती ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह से बिगड़ चुकी है और आम लोग परेशानी झेल रहे हैं। प्रदेश के कई हिस्सों में सरेआम गोलियां चल रही हैं और पुलिस पर भी हमला हुआ है। यहां से जारी बयान में उन्होंने कहा कि प्रदेश की सरकार हर क्षेत्र में विफल साबित हुई है। चाहे वह कानून व्यवस्था हो या फिर जनहित के मुद्दे हों। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेश में इस व्यवस्था के कांग्रेसीकरण का जमकर विरोध करती है और आगे भी करेगी। जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों से वह ऐसी आशा करते हैं कि वे नैतिकता का ध्यान रखें और कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाएं।

उन्होंने कहा कि खासतौर पर जिला ऊना में गोलीकांड हो रहे हैं, उससे प्रतीत होता है कि राज्य में कानून नाम की कोई व्यवस्था ही नहीं है। राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था से आम आदमी पसोपेश में पड़ गया है, लेकिन सरकार कुंभकर्णी नींद सोई हुए है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आपदा प्रबंधन का हवाला देकर पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव टालने की कोशिश कर रही है, लेकिन इससे कुछ नहीं होने वाला है, क्योंकि जनता सब कुछ जानती है।

उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि जो सरकार के हिमायती बने हुए अधिकारी हैं, उन्हें भी भाजपा कतई नहीं बख्शेगी। जनता के काम करने की बजाय कुछेक अधिकारी अपने आकाओं को रिझाने में जुटे हुए हैं, लेकिन भाजपा ऐसे अधिकारियों व कर्मचारियों को भी सीधे रास्ते पर लाएगी।

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