Edited By Kuldeep, Updated: 03 Jan, 2026 05:11 PM

विशेष धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत शिमला ने हिमाचल के कथित फर्जी डिग्री घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में राज्य के एक निजी विश्वविद्यालय के दो प्रवर्तकों को भगौड़ा आर्थिक अपराधी (एफईओ) घोषित किया है।
शिमला (ब्यूरो): विशेष धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत शिमला ने हिमाचल के कथित फर्जी डिग्री घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में राज्य के एक निजी विश्वविद्यालय के दो प्रवर्तकों को भगौड़ा आर्थिक अपराधी (एफईओ) घोषित किया है। अधिकारियों के अनुसार भगौड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (एफईओए) 2018 के तहत मनदीप राणा और उसकी मां अशोनी कंवर के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है। यह दोनों सोलन स्थित मानव भारती विश्वविद्यालय के प्रवर्तक हैं और कंवर का पति राजकुमार राणा विश्वविद्यालय का मुख्य प्रवर्तक है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुसार भगौड़ा घोषित किए गए दोनों आरोपी वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि ईडी ने दिसम्बर 2022 में राजकुमार राणा और 15 अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। इसके बाद विशेष पीएमएलए अदालत ने जनवरी 2023 में मामले का संज्ञान लिया और अशोनी कंवर एवं मनदीप राणा को सम्मन जारी किए। एफईओए का उद्देश्य उन लोगों को कानून के दायरे में लाना है जो कम से कम 100 करोड़ रुपए के मूल्य की धोखाधड़ी करने के बाद कानून के शिकंजे से बचने के लिए भारत छोड़कर चले गए हैं। शराब कारोबारी विजय माल्या और ब्रिटेन में रह रहे हथियार डीलर संजय भंडारी को पूर्व में भगौड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया जा चुका है।