पालमपुर में SDRF का कार्यालय शुरू, DSP रैंक के अधिकारी ने संभाला पदभार

Edited By Vijay, Updated: 23 Mar, 2022 08:00 PM

sdrf office started in palampur

पालमपुर में राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की कंपनी कार्यालय ने कार्य आरंभ कर दिया है। डीएसपी रैंक के अधिकारी ने इस रेंज कार्यालय में पदभार ग्रहण कर लिया है। पालमपुर के समीप बगौड़ा में इसके लिए लगभग 105 कनाल भूमि चिन्हित की गई है, जहां कंपनी...

पालमपुर (भृगु): पालमपुर में राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की कंपनी कार्यालय ने कार्य आरंभ कर दिया है। डीएसपी रैंक के अधिकारी ने इस रेंज कार्यालय में पदभार ग्रहण कर लिया है। पालमपुर के समीप बगौड़ा में इसके लिए लगभग 105 कनाल भूमि चिन्हित की गई है, जहां कंपनी का संरचनागत ढांचा स्थापित किया जाएगा। फिलहाल कंपनी के प्रशासनिक कार्यों के लिए पालमपुर में पुराने एसडीएम कार्यालय परिसर में सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। पालमपुर में स्थापित किया गया राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का रेंज कार्यालय समूचे कांगड़ा जनपद के अतिरिक्त चम्बा, हमीरपुर तथा ऊना जिलों में आपदा प्रबंधन का कार्य देखेगा। समूचे प्रदेश में तीन स्थानों पर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के लिए कंपनी कार्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में पालमपुर में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का कार्यालय स्थापित कर दिया गया है। जानकारी अनुसार कंपनी में फिलहाल 100 से अधिक विभिन्न रैंक का स्टाफ होगा, वहीं पंडोह से उपकरण लाए जाने की प्रक्रिया आरम्भ कर दी गई है। डीएसपी (एसडीआरएफ) सोम दत्त ने बताया कि पालमपुर में एसडीआरएफ रेंज कार्यालय ने कार्य आरंभ कर दिया है। 

उपग्रह आधारित सबसिडैंस सिस्टम प्रोफाइल विकसित किया जाएगा

कांगड़ा प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित है, ऐसे में जोखिम को कम करने के लिए आपदा प्रबंधन के लिए बुनियादी सुविधाएं जुटाने के लिए एक योजना तैयार की गई है। इसी कड़ी में जिला प्रशासन ने आईआईटी मंडी के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है। इसके अंतर्गत कांगड़ा और उससे सटे क्षेत्रों के लिए उपग्रह आधारित सबसिडैंस सिस्टम प्रोफाइल विकसित किया जाएगा। यह प्रणाली भू-स्खलन के लिए एक पूर्व चेतावनी प्रणाली ईडब्ल्यूएस के रूप में कार्य करेगी। आईआईटी मंडी भूस्खलन की भविष्यवाणी के लिए एक उपकरण विकसित करेगी। सैंकड़ों भूस्खलन निगरानी और पूर्व चेतावनी प्रणाली संवेदनशील क्षेत्रों में स्थापित की जाएगी। आईआईटी अलग-अलग स्थानों पर मौसम और मौसम के मिजाज पर नजर रखने के लिए एक सिस्टम भी विकसित करेगा। 

आपदा की दृष्टि से संवेदनशील है क्षेत्र

आपदा विशेषकर भूकंप की दृष्टि से हिमाचल का अधिकतर भू-भाग अत्यंत संवेदनशील है। कांगड़ा, हमीरपुर, ऊना तथा चम्बा जनपद का अधिकांश भू-भाग भूकंप की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील जोन 5 के अंतर्गत आता है। वर्ष 1905 में कांगड़ा में आए विनाशकारी भूकंप के पश्चात वर्ष 1986 में भी 6.8 तीव्रता का भूकंप आया था जिसमें कुछ लोगों की जान गई थी तथा लगभग 65 करोड़ रुपए की संपत्ति उस समय के आकलन के अनुसार क्षतिग्रस्त हुई थी। भूस्खलन तथा बाढ़ व बादल फटने की घटनाओं का क्रम भी इन क्षेत्रों में घटने के मामले सामने आ चुके हैं।  

निरंतर जारी है भूकंम का क्रम

प्रदेश का 32 प्रतिशत भू-भाग भूकंप की दृष्टि से अतिसंवेदनशील है तथा वर्ष 2019 में प्रदेश में भूकंप के 30 जबकि वर्ष 2020 में 40 से अधिक झटके आए हैं जबकि वर्ष 2021 में अब तक की अवधि में प्रदेश भर में लगभग तीन दर्जन बार धरती हिली। धौलाधार के उत्तरी तथा रावी के बाएं किनारे के क्षेत्र को माइक्रोसिस में एक्टिव माना जाता है। गत 10 वर्ष की अवधि में हिमाचल में आए भूकंप में लगभग 42 प्रतिशत भूकंप का केंद्र बिंदु जिला चम्बा व चम्बा की जम्मू-कश्मीर के साथ सटी सीमा रही है। 

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