नियम-कानून को ठेंगा दिखाना 30 निजी स्कूली वाहनों को पड़ा महंगा

Edited By kirti, Updated: 10 Nov, 2018 10:08 AM

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जिला में निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा रामभरोसे है। नूरपुर में हुए स्कूल बस हादसे के बाद भी न तो बच्चों के अभिभावक और न ही निजी स्कूल प्रबंधन सबक सीख पाए हैं। अभी भी स्कूलों में बिना पंजीकृत निजी वाहनों में बच्चों को ढोया जा रहा है।...

धर्मशाला : जिला में निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा रामभरोसे है। नूरपुर में हुए स्कूल बस हादसे के बाद भी न तो बच्चों के अभिभावक और न ही निजी स्कूल प्रबंधन सबक सीख पाए हैं। अभी भी स्कूलों में बिना पंजीकृत निजी वाहनों में बच्चों को ढोया जा रहा है। स्कूली निजी वाहनों की मनमानी के कारण आर.टी.ओ. कांगड़ा ने विभागीय कार्रवाई अमल में लाई है।

जिला कांगड़ा में पिछले कुछ दिनों में नियम-कानून को ठेंगा दिखाने वाले जिला कांगड़ा के 30 निजी स्कूली वाहनों के चालान काटे गए हैं। आर.टी.ओ. कांगड़ा द्वारा काटे गए 30 निजी स्कूली वाहनों के चालान से लगभग 77 हजार रुपए की वसूली की गई है। इससे साफ जाहिर होता है कि छोटे बच्चों को घर से स्कूल जाने व वापस आने के दौरान बच्चों की सुरक्षा को लेकर निजी स्कूल प्रबंधन व अभिभावक कितने गंभीर हैं।

वर्तमान में हालात ये हैं कि अभी भी सड़क हादसों में फूल जैसे बच्चों की जान जाने के बावजूद कोई सबक न सीखकर लापरवाही बरती जा रही है। जिला के निजी स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकतर बच्चे निजी स्कूल वैन या टैक्सी में स्कूल जाते-आते हैं। बता दें कि जिला कांगड़ा के कुछ निजी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए नई स्कूल बसें भी शुरू की गई हैं, लेकिन फिर भी बच्चों को निजी वाहनों के माध्यम से घर से स्कूल व स्कूल से घर छोड़ा जा रहा है।

अभिभावकों की लापरवाही हादसों का सबसे बड़ा कारण
आर.टी.ओ. कांगड़ा मेजर डा. विशाल शर्मा ने बताया कि नूरपुर में हुए बस हादसे के बाद भी अभिभावक अपने बच्चों को जिन निजी वाहनों में स्कूल भेजते हैं, क्या वे वाहन चालक यातायात नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं। क्या निजी टैक्सी चालक के पास लाइसैंस है भी या नहीं, उन्हें इसकी बिल्कुल भी जानकारी नहीं है। यही कारण है कि अभिभावकों की लापरवाही के कारण बच्चे सड़क हादसों का शिकार होते हैं, क्योंकि निजी टैक्सी चालकों के वाहनों में वह जरूरी सामान उपलब्ध नहीं होता है, जो स्कूली वाहनों में होना चाहिए।

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