Edited By Vijay, Updated: 22 Mar, 2026 07:26 PM

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने दावा किया है कि बजट को लेकर जनता तो छोड़िए कांग्रेस नेताओं में भी कोई उत्साह नहीं है। उन्होंने इसे प्रदेश के इतिहास का सबसे निराशाजनक दस्तावेज.....
शिमला (ब्यूरो): नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने दावा किया है कि बजट को लेकर जनता तो छोड़िए कांग्रेस नेताओं में भी कोई उत्साह नहीं है। उन्होंने इसे प्रदेश के इतिहास का सबसे निराशाजनक दस्तावेज करार देते हुए कहा कि अपने राजनीतिक जीवन में लगातार 29 बजट विधानसभा में पेश होते देखे हैं, लेकिन इस तरह का नीरस और दिशाहीन बजट पहले कभी नहीं देखा। इस बजट को देखकर प्रदेश की जनता अपना माथा पीट रही है और उसे इस बात का पछतावा हो रहा है कि उन्होंने सत्ता ऐसे दल को सौंप दी है, जिसने अपनी नाकामियों और गलत नीतियों से हिमाचल प्रदेश को विकास के पायदान से नीचे धकेल कर गर्त में डाल दिया है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि केंद्रीय योजनाओं के नाम बदलकर अपनी वाहवाही लूटने की कोशिश की गई है, लेकिन धरातल पर बजट का कोई वास्तविक प्रावधान नहीं है, जिसके कारण आज प्रदेश का कोई भी वर्ग इस बजट से संतुष्ट या उत्साहित नहीं है और मुख्यमंत्री को अपनी विफलताएं छिपाने के लिए सदन में मजाक का सहारा लेना पड़ रहा है। व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर प्रदेश में पहली बार ऐसी सरकार आई है जो प्रदेशवासियों को कुछ देने के बजाय उनसे छीनने और उनसे लेने में यकीन रखती है। सत्ता में आते ही मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सुविधा के लिए पूर्व सरकार द्वारा बनाए गए 2000 से ज्यादा संस्थान उनसे छीन लिए और अब जाते-जाते लोगों से जनहित योजनाओं का बजट और कर्मचारियों की सैलरी छीन रही है। सरकार का अत्याचार बहुत हो गया अब यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री के व्यवहार पर भी गंभीर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि पूरे बजट भाषण के दौरान मुख्यमंत्री का अहंकार सातवें आसमान पर रहा।
जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस बजट को तैयार करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की मेहनत को पूरी तरह दरकिनार कर दिया और उन्हें दूध से मक्खी की तरह निकालकर बाहर फैंक दिया, जबकि सारा श्रेय खुद लेने की कोशिश में वह इस तरह बोल रहे थे जैसे पूरा बजट उन्होंने अकेले ही तैयार किया हो। इस बजट में विकास के नाम पर जो कुछ भी दावा किया गया वह केंद्र सरकार की योजनाओं के जरिए ही हो पाएगा। चाहे प्रदेश में सड़कें बनने की घोषणा हो या फिर नैशनल हैल्थ मिशन के कर्मचारियों के मानदेय में वृद्धि, सारा पैसा केंद्र सरकार द्वारा ही दिया जाएगा। इसमें मुख्यमंत्री का अपना क्या योगदान है?
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