Edited By Jyoti M, Updated: 12 Apr, 2026 04:50 PM

हिमाचल प्रदेश में पिछले एक सप्ताह से जारी बेमौसम बारिश, बर्फबारी और भयंकर ओलावृष्टि ने राज्य के किसानों और बागवानों की कमर तोड़ दी है। तेज आंधी और तूफान के साथ हुए इस मौसम परिवर्तन ने तैयार फसलों को बर्बाद कर दिया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को...
हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश में पिछले एक सप्ताह से जारी बेमौसम बारिश, बर्फबारी और भयंकर ओलावृष्टि ने राज्य के किसानों और बागवानों की कमर तोड़ दी है। तेज आंधी और तूफान के साथ हुए इस मौसम परिवर्तन ने तैयार फसलों को बर्बाद कर दिया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है।
इन जिलों में हुआ सबसे ज्यादा नुकसान
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिमला, कुल्लू, मंडी, सोलन और किन्नौर जिलों में सबसे अधिक असर देखने को मिला है। यहाँ सेब, मटर, जौ और स्टोन फ्रूट्स (जैसे प्लम, खुमानी) की फसलों को 40% से 60% तक नुकसान होने का अनुमान है।
शिमला और कुल्लू के ऊपरी क्षेत्रों में सेब के पेड़ अभी 'फ्लावरिंग स्टेज' (फूल आने की अवस्था) पर थे। ओले गिरने से ये फूल झड़ गए हैं, जिससे भविष्य में फलों की पैदावार पर संकट मंडरा रहा है।
निचले इलाकों जैसे मंडी, बिलासपुर, कांगड़ा और हमीरपुर में गेहूं की फसल कटाई के लिए तैयार थी, लेकिन भारी बारिश और आंधी के कारण फसल खेतों में ही बिछ गई है।
बागवानों का दर्द: "मेहनत पर फिरा पानी"
स्थानीय बागवानों का कहना है कि पिछले साल सूखे ने मार दी थी और इस बार ओलावृष्टि ने सब कुछ खत्म कर दिया। पूरे साल की कमाई हाथ से निकल जाने के कारण किसानों ने सरकार से गुहार लगाई है कि जल्द से जल्द नुकसान का आकलन कर उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए।
बीमा कंपनियों की कार्यप्रणाली पर सवाल
किसान नेता हरीश चौहान ने आरोप लगाया है कि मौसम आधारित फसल बीमा योजना का लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। उनके अनुसार, बीमा कंपनियां समय पर भुगतान नहीं करती हैं, जिससे बागवानों की आर्थिक स्थिति और बिगड़ रही है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इन कंपनियों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि किसानों को उनका हक मिल सके।
सरकार का पक्ष: मुआवजे की तैयारी
हिमाचल के राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विभाग को तुरंत नुकसान का आंकलन (Assessment) करने के निर्देश दे दिए गए हैं।
वर्तमान मुआवजा राशि कम है, इसलिए केंद्र सरकार से इसे बढ़ाने की सिफारिश की जाएगी। बीमा कंपनियों को चेतावनी दी गई है कि यदि वे किसानों को समय पर मुआवजा नहीं देती हैं, तो सरकार उनके खिलाफ सख्त कदम उठाएगी।