साइबर ठगों के जाल में फंसे कांगड़ा के 8 छात्र, पैसों के लालच में बेचे बैंक खाते! हुआ करोड़ों का अवैध लेन-देन

Edited By Swati Sharma, Updated: 01 Mar, 2026 02:33 PM

kangra news eight college students became weapons of cyber fraudsters

Kangra News: कांगड़ा जिले के आठ कॉलेज छात्रों के लिए 'घर बैठे कमाई' का सपना एक बड़ी मुसीबत बन गया है। महज 5 से 10 हजार रुपये प्रतिमाह कमाने के लालच में इन युवाओं ने अनजाने में अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड साइबर अपराधियों को सौंप दिए। अब...

Kangra News: कांगड़ा जिले के आठ कॉलेज छात्रों के लिए 'घर बैठे कमाई' का सपना एक बड़ी मुसीबत बन गया है। महज 5 से 10 हजार रुपये प्रतिमाह कमाने के लालच में इन युवाओं ने अनजाने में अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड साइबर अपराधियों को सौंप दिए। अब ये सभी छात्र पुलिसिया रडार पर हैं, क्योंकि उनके इन खातों का उपयोग करोड़ों रुपये के अवैध लेन-देन (म्यूल अकाउंट्स) के लिए किया गया है।

कैसे बुना गया ठगी का जाल?

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ये छात्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और टेलीग्राम के जरिए राजस्थान के एक संगठित साइबर गिरोह के संपर्क में आए थे। शातिरों ने उन्हें एक लुभावनी 'इन्वेस्टमेंट स्कीम' का झांसा दिया। गिरोह ने छात्रों को नए बैंक खाते खुलवाने और उनकी पूरी किट- जिसमें पासबुक, एटीएम कार्ड और लिंक्ड सिम कार्ड शामिल थे- कूरियर के जरिए उन तक पहुंचाने को कहा। बदले में छात्रों को हर महीने एक निश्चित राशि देने का प्रलोभन दिया गया था।

करोड़ों का ट्रांजेक्शन और पुलिसिया नोटिस

जैसे ही इन खातों का नियंत्रण ठगों के पास पहुंचा, उन्होंने इनका इस्तेमाल साइबर ठगी की काली कमाई को खपाने (मनी लॉन्ड्रिंग) के लिए करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते इन खातों के जरिए करोड़ों रुपये का संदिग्ध लेन-देन हुआ। जब देश के विभिन्न राज्यों की पुलिस ने इन खातों को ट्रैक किया और ठगी के मामलों में इनके होल्ड होने की सूचना छात्रों के घरों तक पहुंची, तब जाकर उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ।

छात्रों ने ली पुलिस की शरण

अपने घरों पर पुलिस के नोटिस आने से घबराए छात्रों ने आखिरकार धर्मशाला स्थित साइबर क्राइम पुलिस थाना पहुंचकर अपनी आपबीती सुनाई। साइबर पुलिस अब पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है और उन गिरोहों के लिंक खंगाल रही है, जिन्होंने इन छात्रों को मोहरा बनाया। साइबर क्राइम डीआईजी रोहित मालपानी ने कहा कि युवाओं को यह समझना होगा कि अपना बैंक विवरण, सिम या एटीएम किसी भी अज्ञात व्यक्ति को सौंपना एक बड़ा अपराध है। छात्र लालच में आकर अपना भविष्य दांव पर न लगाएं।

पुलिस की सख्त चेतावनी

साइबर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि भले ही छात्रों ने अनजाने में ऐसा किया हो, लेकिन 'म्यूल अकाउंट' के जरिए हुए हर अवैध ट्रांजेक्शन के लिए वे कानूनी तौर पर जिम्मेदार माने जाएंगे। पुलिस ने जनता से अपील की है कि किसी भी प्रलोभन में आकर अपनी बैंकिंग साख किसी अन्य को न दें।

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