Bilaspur: खाते में नहीं थे पैसे... काट दिया ₹4 लाख का चैक, अब कोर्ट ने सुनाया ऐसा फैसला कि उड़ गए दोषी के होश

Edited By Vijay, Updated: 11 Jan, 2026 02:49 PM

imprisonment and fine in cheque bounce case

घुमारवीं स्थित न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (कोर्ट नंबर 2) स्वाति बरवाल की अदालत ने चैक बाऊंस के एक मामले में कड़ा फैसला सुनाया है।

घुमारवीं (जम्वाल): घुमारवीं स्थित न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (कोर्ट नंबर 2) स्वाति बरवाल की अदालत ने चैक बाऊंस के एक मामले में कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 3 माह की साधारण कैद और 6 लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। यदि दोषी समय पर जुर्माना अदा नहीं करता है तो उसे 2 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

शिकायतकर्ता के वकील आरएल मेहता ने जानकारी देते हुए बताया कि यह मामला वर्ष 2016 का है। एके एग्रो ग्रीन कंपनी के एकल मालिक अमरेंद्र चोपड़ा निवासी  मतवाना ने पंजाब के लुधियाना जिले के खैरा गांव निवासी दलजीत सिंह पुत्र गुरदेव सिंह की निजी जमीन पर ग्रीनहाऊस लगाने का काम किया था। तय शर्तों के अनुसार इस प्रोजैक्ट में सरकारी सबसिडी के अलावा शेष राशि का भुगतान दलजीत सिंह को करना था। कार्य संपन्न होने पर जब अमरेंद्र ने अपनी बकाया राशि मांगी तो दलजीत ने उसे 4 लाख रुपए का चेक सौंपा।

अमरेंद्र चोपड़ा ने भुगतान के लिए चैक बैंक में जमा करवाया, लेकिन दलजीत सिंह के खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण चैक बाऊंस हो गया। इसके बाद अमरेंद्र ने आरोपी को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं आया। अंततः परेशान होकर उसने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान साक्ष्यों के आधार पर चैक बाऊंस का आरोप सिद्ध हो गया, जिस पर न्यायिक दंडाधिकारी स्वाति बरवाल ने आरोपी दलजीत सिंह को दोषी मानते हुए 6 लाख रुपए का हर्जाना और 3 महीने की सजा का आदेश दिया।

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