सुक्खू सरकार का बड़ा फैसला: प्राइवेट स्कूलों पर भी लागू हुआ यह नियम

Edited By Jyoti M, Updated: 05 Dec, 2025 11:59 AM

himachal this rule has now been applied to private schools as well

हिमाचल प्रदेश में शिक्षा नीति में एक बड़ा बदलाव आया है। राज्य सरकार ने निजी विद्यालयों के छात्रों के लिए भी अब यह अनिवार्य कर दिया है कि उन्हें पाँचवीं और आठवीं कक्षा की वार्षिक परीक्षाओं में आवश्यक अंक प्राप्त करने होंगे, अन्यथा उन्हें अगली कक्षा...

हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश में शिक्षा नीति में एक बड़ा बदलाव आया है। राज्य सरकार ने निजी विद्यालयों के छात्रों के लिए भी अब यह अनिवार्य कर दिया है कि उन्हें पाँचवीं और आठवीं कक्षा की वार्षिक परीक्षाओं में आवश्यक अंक प्राप्त करने होंगे, अन्यथा उन्हें अगली कक्षा में प्रमोट नहीं किया जाएगा।

यह निर्णय केंद्र सरकार द्वारा 'निश्शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009' (Right to Education Act 2009) में किए गए संशोधन को राज्य के सभी निजी स्कूलों पर लागू करने के बाद लिया गया है।

छात्रों को मिलेगा एक और मौका

इस नई प्रणाली के तहत, यदि कोई विद्यार्थी पहली बार में परीक्षा पास नहीं कर पाता है, तो उसे अपनी कमियों को दूर करने और सफल होने के लिए एक दूसरा अवसर दिया जाएगा। हालांकि, यदि छात्र इस दूसरे मौके में भी अपेक्षित न्यूनतम अंक प्राप्त करने में असफल रहते हैं, तो उन्हें उसी कक्षा में फेल घोषित कर दिया जाएगा।

कब से लागू होगी नई व्यवस्था?

शीतकालीन स्कूलों (Winter Closing Schools) में यह नियम दिसंबर 2025 की परीक्षाओं से लागू होगा।

ग्रीष्मकालीन अवकाश वाले स्कूलों (Summer Closing Schools) में यह व्यवस्था मई में होने वाली परीक्षाओं से प्रभावी होगी।

स्कूल शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में सभी जिला अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। निदेशक स्कूल शिक्षा, आशीष कोहली, ने इस महत्त्वपूर्ण बदलाव की पुष्टि की है।

पास होने के लिए क्या हैं शर्तें?

यह व्यवस्था पिछले साल सरकारी स्कूलों में शुरू की गई थी और अब निजी संस्थानों को भी इसके दायरे में लाया गया है। केंद्र सरकार ने दिसंबर 2024 में अधिनियम में संशोधन किया था, जिसके अनुसार छात्रों को सफल घोषित करने के लिए दो मुख्य शर्तें पूरी करनी होंगी:

कुल प्राप्तांक: छात्रों को समग्र रूप से 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य है।

विषयवार अनिवार्यता: शैक्षिक मूल्यांकन (SA-1) और वर्ष के अंत के मूल्यांकन (SA-2) के प्रत्येक विषय में भी कम से कम 33 प्रतिशत अंक लाना ज़रूरी होगा।

इस पहल का उद्देश्य छात्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और गंभीरता को बढ़ावा देना है, जिससे 8वीं कक्षा के बाद की चुनौतियों के लिए वे बेहतर ढंग से तैयार हो सकें।

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