हिमाचल के लाल चावल मणिपुर और मेघालय में भी बिखेरेंगे अपनी महक

Edited By Vijay, Updated: 24 Aug, 2021 11:59 PM

himachal s red rice will spread fragrance in manipur and meghalaya

हिमाचल के धरोहर लाल चावल मणिपुर और मेघालय में भी महक बिखेरेंगे। सैंट्रल वैरायटी रिलीज कमेटी द्वारा लाल चावल की किस्म एचपीआर-2795 (हिम पालम लाल धान-1) को हिमाचल के अलावा मणिपुर और मेघालय राज्यों के असिंचित क्षेत्रों में भी उगाया जा सकेगा।

पालमपुर (भृगु): हिमाचल के धरोहर लाल चावल मणिपुर और मेघालय में भी महक बिखेरेंगे। सैंट्रल वैरायटी रिलीज कमेटी द्वारा लाल चावल की किस्म एचपीआर-2795 (हिम पालम लाल धान-1) को हिमाचल के अलावा मणिपुर और मेघालय राज्यों के असिंचित क्षेत्रों में भी उगाया जा सकेगा। धान की यह किस्म हिमाचल की उन्नत धरोहर लैंड रेस है। ऐसे में दूसरे राज्यों के माध्यम से भी इस महत्वपूर्ण लैंड रेस को सहेजा जा सकेगा। हिमाचल के शिमला के रोहड़ू, चम्बा, कांगड़ा व मंडी के कुछ क्षेत्रों में लाल चावल उगाए जाते हैं। कृषि विश्वविद्यालय द्वारा रोहड़ू क्षेत्र के लाल चावल के लिए भौगोलिक संकेतक प्राप्त करने के लिए प्रक्रिया आरंभ की गई है।

गर्भवती महिलाओं के लिए प्रमुखता से उपयोग होता है छोहारटू लाल चावल 

रोहड़ू क्षेत्र के छोहारटू लाल चावल का उपयोग गर्भवती महिलाओं के लिए प्रमुखता से किया जाता है तो शुभ अवसरों पर भी लाल चावल को शुभ माना जाता है। चावल की इस किस्म को पहले ही प्लांट वैरायटी एंड फार्मर राइट एक्ट 2001 के अंतर्गत पंजीकृत करवाया गया है। हिमाचल प्रदेश में फसलों की यह पहली ऐसी किस्म थी जिसे इस एक्ट के अंतर्गत पंजीकृत करवाया गया है। यह किस्म छोहारा व रनसर घाटियों में 1500 से 2000 मीटर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उगाई जाती है। लाल धान की करड किस्म को भी संरक्षित किए जाने की कवायद आरंभ की गई है। चम्बा की परंपरागत फसल प्रजातियों में से एक करड लाल धान को संरक्षित किए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

कई गुणों से है भरपूर

विशेषज्ञ बताते हैं कि लाल चावल पोषक तत्वों, आयरन, जिंक, विभिन्न विटामिन तथा एंटी ऑक्सीडैंट्स से भरपूर होते हैं तथा महिलाओं के गर्भावस्था तथा प्रदर रोग से लड़ने में सहायक माने जाते हैं। लाल चावलों की मांग अधिक होने से यह 400-500 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से बिकते हैं।

रोहड़ू लाल चावल के लिए जीआई टैग प्राप्त करने को किया आवेदन

कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के कुलपति प्रो. हरींद्र कुमार चौधरी ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय हिमाचल की संभावित लैंड रेसिज की पहचान और संरक्षण के लिए प्रयासरत है। शिमला, चम्बा, कांगड़ा और मंडी के लाल चावल की राज्य से बाहर भी काफी मांग है। इसके दृष्टिगत पहले ही रोहड़ू लाल चावल के लिए जीआई टैग प्राप्त करने के लिए आवेदन किया है और रोहड़ू के किसानों द्वारा जीनोम सेवियर अवार्ड के लिए भी आवेदन प्रस्तुत करवाया गया है। लाल चावल की हिमाचल की किस्म एचपीआर-2795 जो हिमाचल की एक उन्नत लैंड रेस है को सैंट्रल वैरायटी रिलीज कमेटी द्वारा हिमाचल प्रदेश, मणिपुर व मेघालय के असिंचित क्षेत्रों के लिए जारी किया गया है।

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