हिमाचल के कैप्टन योगेंद्र को राष्ट्रपति करेंगे शौर्य चक्र से सम्मानित, मुठभेड़ में आतंकी को किया था ढेर

Edited By Jyoti M, Updated: 27 Jan, 2026 03:53 PM

himachal captain yogendra will be awarded the shaurya chakra by the president

जब इरादे हिमालय जैसे ऊंचे हों, तो दुश्मन की हर साज़िश घुटने टेक देती है। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर भारतीय सेना में अपनी बहादुरी का लोहा मनवाने वाले कैप्टन योगेंद्र ठाकुर ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है।

हिमाचल डेस्क। जब इरादे हिमालय जैसे ऊंचे हों, तो दुश्मन की हर साज़िश घुटने टेक देती है। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर भारतीय सेना में अपनी बहादुरी का लोहा मनवाने वाले कैप्टन योगेंद्र ठाकुर ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। जम्मू-कश्मीर की दुर्गम वादियों में अपनी जान की परवाह किए बिना आतंकवादियों से लोहा लेने वाले इस जांबाज ऑफिसर को अब देश के सर्वोच्च नागरिक, महामहिम राष्ट्रपति द्वारा 'शौर्य चक्र' से नवाजा जाएगा।

वह मुठभेड़ जिसने टाला बड़ा हमला

यह कहानी शुरू होती है जुलाई 2025 के उस चुनौतीपूर्ण सप्ताह से, जब खुफिया इनपुट्स ने सुरक्षा बलों की नींद उड़ा दी थी। उधमपुर के बीहड़ और ऊबड़-खाबड़ रास्तों में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों की मौजूदगी की पुख्ता खबर थी।

रणनीति और साहस: कैप्टन योगेंद्र को इस खतरनाक मिशन की कमान सौंपी गई।

सटीक निशाना: 26 जुलाई 2025 को भीषण गोलीबारी के बीच, योगेंद्र ने अपनी लीडरशिप और युद्ध कौशल का परिचय देते हुए एक खूंखार आतंकी को मार गिराया।

सुरक्षा कवच: उनकी इस त्वरित कार्रवाई ने न केवल दुश्मन के पैर उखाड़ दिए, बल्कि देश के भीतर होने वाले एक संभावित बड़े आत्मघाती हमले को भी विफल कर दिया।

गांव 'दारट बगला' में दीवाली जैसा माहौल

जोगिंद्रनगर उपमंडल की ग्राम पंचायत दारट बगला में आज हर आंख में गर्व के आंसू हैं। कैप्टन योगेंद्र के पिता अनिल ठाकुर (सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य) और माता बीना देवी के घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर सेना के शिखर तक पहुँचने वाले योगेंद्र आज प्रदेश के हर युवा के लिए 'रोल मॉडल' बन चुके हैं।

"योगेंद्र की इस उपलब्धि ने साबित कर दिया है कि पहाड़ के युवाओं के खून में ही देशप्रेम और साहस दौड़ता है। यह सम्मान सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरी देवभूमि का है।" — स्थानीय निवासी

शिक्षा से शौर्य तक का सफर

कैप्टन योगेंद्र की शुरुआती शिक्षा सरस्वती विद्या मंदिर में हुई, जहाँ से उन्होंने अनुशासन और राष्ट्रभक्ति के पाठ पढ़े। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर स्कूल प्रबंधन और उनके पुराने शिक्षक भी गदगद हैं। स्कूल के प्रधानाचार्य नवीन शर्मा और अश्वनी सूद ने उनकी वीरता को याद करते हुए कहा कि योगेंद्र ने अपनी कड़ी मेहनत से जोगिंद्रनगर का नाम पूरे भारत के मानचित्र पर स्वर्णाक्षरों में लिख दिया है।

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