हिमाचल में 'कुदरत का ट्रेलर': मार्च में ही जून जैसी तपिश, 8 शहरों में पारे का 'ट्रिपल जम्प'

Edited By Jyoti M, Updated: 05 Mar, 2026 04:36 PM

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देवभूमि हिमाचल में इस बार कुदरत के मिजाज ने सबको हैरान कर दिया है। अभी कैलेंडर में मार्च का पहला हफ्ता ही बीता है, लेकिन पहाड़ों की वादियों में चिलचिलाती धूप ने जून महीने जैसी बेचैनी पैदा कर दी है।

शिमला। देवभूमि हिमाचल में इस बार कुदरत के मिजाज ने सबको हैरान कर दिया है। अभी कैलेंडर में मार्च का पहला हफ्ता ही बीता है, लेकिन पहाड़ों की वादियों में चिलचिलाती धूप ने जून महीने जैसी बेचैनी पैदा कर दी है।

आलम यह है कि ऊंचाई वाले इलाकों को छोड़ दें, तो प्रदेश के मैदानी और मध्यवर्ती जिले अभी से 30 डिग्री सेल्सियस के आंकड़े को पार कर चुके हैं। शीतकाल में बर्फ की सफेद चादर के लिए तरसने वाले हिमाचल में अब 'हीट वेव' की आहट समय से पहले सुनाई देने लगी है।

गर्मी का नया रिकॉर्ड: मैदानों में उछला पारा

हिमाचल के निचले इलाकों में सूरज की तपिश अब बर्दाश्त से बाहर होने लगी है। बीते 24 घंटों के दौरान सुंदरनगर, ऊना, कांगड़ा, सोलन, हमीरपुर और भुंतर जैसे क्षेत्रों में पारा सामान्य से कहीं ऊपर जाकर 30 डिग्री के पार दर्ज किया गया। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार सर्दियों में बारिश और बर्फबारी की भारी कमी (लगभग 45% कम) के चलते नमी गायब हो गई है, जिससे शुष्क गर्मी ने जल्दी पैर पसार लिए हैं।

मौसम विभाग की चेतावनी: रातें भी होंगी गर्म

शिमला स्थित मौसम केंद्र के अनुसार, मार्च का महीना इस बार सामान्य नहीं रहने वाला। वैज्ञानिकों ने अनुमान जताया है कि रात के तापमान में 55% से 75% तक सामान्य से अधिक बढ़ोतरी देखी जा सकती है। यानी अब रातें भी उतनी ठंडी नहीं रहेंगी जितनी मार्च में होती हैं। मध्य और उच्च पहाड़ी क्षेत्रों में अधिकतम तापमान औसत से काफी ज्यादा रहने की 75% तक संभावना है।

लू का खतरा: हालांकि मार्च में लू (Loo) के चलने की आशंका सामान्य है, लेकिन अप्रैल से मई के बीच निचले और मध्य इलाकों में लू वाले दिनों की संख्या में 10% से 20% तक का इजाफा हो सकता है।

सूखे की मार: 125 सालों में 9वीं बार सबसे सूखा फरवरी

इस साल विंटर सीजन का गणित पूरी तरह बिगड़ चुका है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 1901 के बाद से यह 9वां ऐसा साल है जब फरवरी का महीना इतना सूखा रहा है। फरवरी में सामान्य के मुकाबले 85% कम वर्षा हुई है। पिछले वर्षों की तुलना में केवल 2022 और 2023 ही ऐसे साल रहे जब मानसून और सर्दियों में ठीक-ठाक बारिश हुई, अन्यथा सूखे का ट्रेंड बढ़ता जा रहा है।

जल संकट की दस्तक

बढ़ते तापमान का सीधा असर हिमाचल के प्राकृतिक जल स्रोतों पर पड़ने वाला है। बर्फबारी कम होने और समय से पहले गर्मी बढ़ने के कारण ग्लेशियर और चश्मे तेजी से सूख सकते हैं। यदि मार्च में भी बारिश का कोटा पूरा नहीं हुआ, तो आने वाले गर्मियों के महीनों में पहाड़ों पर पानी के लिए त्राहि-त्राहि मच सकती है।

राहत की उम्मीद: क्या होगी बारिश?

झुलसा देने वाली गर्मी के बीच एक हल्की राहत की खबर भी है। 

7, 9 और 10 मार्च को ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी और बारिश की संभावना है।

11 मार्च को इस दिन प्रदेश के निचले और मध्य पहाड़ी इलाकों में भी छिटपुट बूंदाबांदी हो सकती है, जिससे तापमान में 2 से 8 डिग्री तक की गिरावट आ सकती है।

सप्ताह के शेष दिनों में मौसम मुख्य रूप से साफ और शुष्क ही रहने वाला है।

कृषि और बागवानी से जुड़े लोगों को सलाह दी गई है कि वे नमी के संरक्षण पर ध्यान दें, क्योंकि आने वाले दो महीनों में पारा सामान्य से ऊपर रहने का प्रबल अनुमान है।

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