Edited By Jyoti M, Updated: 02 Mar, 2026 03:41 PM

हिमाचल प्रदेश के बागवानी क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जलवायु परिवर्तन और मौसम की अनिश्चितताओं के कारण पारंपरिक सेब की खेती पर मंडराते संकट को देखते हुए, प्रदेश सरकार अब 'ब्लूबेरी' को एक लाभकारी विकल्प के रूप में बढ़ावा दे रही है।
हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश के बागवानी क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जलवायु परिवर्तन और मौसम की अनिश्चितताओं के कारण पारंपरिक सेब की खेती पर मंडराते संकट को देखते हुए, प्रदेश सरकार अब 'ब्लूबेरी' को एक लाभकारी विकल्प के रूप में बढ़ावा दे रही है।
आय का नया जरिया और सरकारी पहल
ब्लूबेरी न केवल अपने पोषण मूल्यों के लिए मशहूर है, बल्कि यह बागवानों की किस्मत बदलने की क्षमता भी रखती है। बाजार में इसकी कीमत 800 रुपये से लेकर 2000 रुपये प्रति किलो तक है। इसकी क्षमता को देखते हुए केंद्र सरकार ने आगामी वित्त वर्ष के लिए 5 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है।
इस योजना के तहत, बागवानी विभाग उन्नत किस्म के पौधे तैयार कर रहा है। इसके लिए इटली और अन्य देशों से उच्च गुणवत्ता वाले 'टिश्यू कल्चर' आयात किए गए हैं, ताकि किसानों को बेहतरीन पौधे उपलब्ध कराए जा सकें।
प्रमुख अनुसंधान केंद्र
वर्तमान में प्रदेश के पांच प्रमुख स्थानों पर ब्लूबेरी की विभिन्न किस्मों पर शोध और नर्सरी तैयार करने का काम चल रहा है:
नौणी विश्वविद्यालय (सोलन)
कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर
बजौरा
खड़ापत्थर
जोगिंद्रनगर के सरकारी फार्म
सेहत के लिए 'सुपरफूड'
ब्लूबेरी स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार इसमें मौजूद 'टेरोस्टिलबिन' नामक एंटीऑक्सीडेंट कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में सहायक है। यह कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित कर दिल की बीमारियों के खतरे को कम करती है। इसमें प्रचुर मात्रा में एंथोसायनिन, फाइबर, विटामिन-C, E और A पाए जाते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।
बागवानी सचिव सीपाल रासु के अनुसार, इस पहल से न केवल प्रदेश की आर्थिकी सुधरेगी, बल्कि बागवानों को पारंपरिक फसलों के सुरक्षित विकल्प भी मिलेंगे।