Edited By Vijay, Updated: 03 Apr, 2025 10:38 PM

विशेष न्यायाधीश-सह-अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-1 कांगड़ा की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बागवानी विभाग के पूर्व अधिकारी को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी करार दिया।
धर्मशाला (ब्यूरो): विशेष न्यायाधीश-सह-अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-1 कांगड़ा की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बागवानी विभाग के पूर्व अधिकारी को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी करार दिया। न्यायालय ने आरोपी को धारा 409 के तहत दो वर्ष के कठोर कारावास और 10,000 रुपए जुर्माना, धारा 467 के तहत दो वर्ष की कैद 10,000 रुपए जुर्माना, धारा 471 के तहत दो वर्ष की कैद व 10,000 रुपए जुर्माना और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13 (2) के तहत दो साल की कैद व 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने की स्थिति में आरोपी को अतिरिक्त तीन महीने की सजा भुगतनी होगी।
जिला न्यायवादी, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो धर्मशाला देवेंद्र चौधरी ने बताया कि तहसील बैजनाथ के तहत आते बड़ा भंगाल के एक निवासी ने पुलिस अधीक्षक, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो धर्मशाला को शिकायत दी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि वर्ष 2004-05 में बागवानी विभाग द्वारा बड़ा भंगाल के किसानों को फलदार पौधों की सबसिडी दी जानी थी, लेकिन यह सहायता राशि किसानों तक नहीं पहुंची। विभाग की ओर से जाली रसीदें तैयार कर ली गईं और किसानों के नाम पर फर्जी दस्तावेज बनाकर सबसिडी की रकम हड़प ली गई।
जब मामले की जांच की गई तो पाया गया कि संबंधित विभाग के अधिकारी ने किसानों की ओर से फर्जी आवेदन तैयार किए और उनके जाली हस्ताक्षर किए। इतना ही नहीं, सबसिडी के लिए जारी किए गए बेयरर चैक पर भी जाली हस्ताक्षर कर बैंक से राशि निकाल ली। इस तरह अधिकारी ने कुल 1,82,000 रुपए की राशि का गबन कर लिया। इन सारे सबूतों के आधार पर न्यायालय द्वारा मामले में संलिप्त अधिकारी को विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया। इसके अलावा, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा के तहत भी उन्हें सजा सुनाई गई। ये सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
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