मनाली में 2 वर्षों से जंग खा रही इलैक्ट्रिक बसेें, एक की कीमत है 1 करोड़ 99 लाख रुपए

Edited By kirti, Updated: 05 Feb, 2020 11:20 AM

electricals have been rusting in manali for 2 years

हिमाचल प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण सुविधा प्रदान करने के लिए खरीदी गई इलैक्ट्रिक बसें जंग खा रही हैं। स्टाफ के अभाव में ये सड़कों पर उतर नहीं पा रहीं। नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर सरकार ने इलैक्ट्रिक बसें तो खरीद ली थीं लेकिन ....

मनाली : हिमाचल प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण सुविधा प्रदान करने के लिए खरीदी गई इलैक्ट्रिक बसें जंग खा रही हैं। स्टाफ के अभाव में ये सड़कों पर उतर नहीं पा रहीं। नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर सरकार ने इलैक्ट्रिक बसें तो खरीद ली थीं लेकिन 2 वर्षों से ये बसें मनाली वोल्वो स्टैंड पर खड़ी हैं। पर्यटन स्थल रोहतांग दर्रे पर यात्री वाहनों की आवाजाही के कारण बिगड़ते पर्यावरण के मद्देनजर एन.जी.टी. ने जब यहां के लिए वाहनों की संख्या निर्धारित की तो विकल्प के तौर पर प्रदूषण रहित गाडिय़ों की परिकल्पना सामने आई। सरकारी स्तर पर किए गए ट्रायल के बाद पहाड़ी इलाके के लिए इलैक्ट्रिक बसों के रूप में विकल्प सामने आया। लगभग एक करोड़ 99 लाख रुपए प्रति बस के हिसाब से खरीदी गई बसों में से 25 कुल्लू-मनाली डिपो को दी गई।

जिला को मिली 25 इलैक्ट्रिक बसों में से कुछ ही बसें कुछ रूटों पर चल रही हैं। हालांकि पर्यटन सीजन के दौरान इन अतिरिक्त बसों को रोहतांग दर्रे सहित अन्य रूट पर चलाया जाता है। जिला में नवम्बर, 2017 से लेकर जितनी इलैक्ट्रिक बसें चलीं, उससे निगम को लाखों रुपए का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ है जबकि इनके संचालन में खर्च भी कम है। इसमें इलैक्ट्रिक बस फ्लीट के लिए अलग स्टाफ न होने के चलते चालक-परिचालक का वेतन शामिल नहीं है जो अन्य बस रूट के हिसाब से बंट जाता है फिर भी यदि स्टाफ की अलग भर्ती भी की जाए तो भी इन बसों से निगम को कमाई ही होगी।

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