Himachal: चिट्टा कारोबारी, अवैध कब्जाधारी और बैंक डिफाल्टर नहीं लड़ पाएंगे पंचायत चुनाव, राज्यपाल ने संशोधन विधेयक को दी मंजूरी

Edited By Vijay, Updated: 06 May, 2026 11:09 AM

drug traffickers or bank defaulters will not able to contest panchayat election

हिमाचल प्रदेश में चिट्टा/हैराइन (सिंथैटिक ड्रग) के अवैध कारोबार में संलिप्त आरोपी हैं या जिन पर ऐसे मामलों में आरोप तय हो चुके हैं, वे पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।

शिमला (भूपिन्द्र): हिमाचल प्रदेश में चिट्टा/हैराइन (सिंथैटिक ड्रग) के अवैध कारोबार में संलिप्त आरोपी हैं या जिन पर ऐसे मामलों में आरोप तय हो चुके हैं, वे पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इसे लेकर प्रदेश सरकार की ओर से भेजे हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2026 को राज्यपाल ने मंजूरी दे दी है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह संशोधन विधेयक राज्य में लागू हो गया है तथा इसी चुनाव से प्रभावी होगा। राज्य सरकार ने इन लोगों को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए विधानसभा में यह बिल पारित किया था।

इसके तहत नशे के मामलों में संलिप्त लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई निर्वाचित प्रतिनिधि (प्रधान, उपप्रधान, वार्ड सदस्य आदि) चुनाव जीतने के बाद भी चिट्टा मामले में संलिप्त पाया जाता है या उस पर आरोप लगते हैं तो उसे पद से हटाया जा सकेगा। वहीं ऐसे मामलों में दोषी पाए गए व्यक्ति पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इस फैसले से नशे के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और पंचायत स्तर पर स्वच्छ एवं पारदर्शी नेतृत्व सुनिश्चित होगा।

विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि अवैध कब्जाधारक, सहकारी बैंकों के डिफाल्टर और ऑडिट रिकवरी लंबित रखने वाले व्यक्ति भी पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य होंगे। इन सख्त प्रावधानों से पंचायतों में पारदर्शिता बढ़ेगी, विकास कार्यों में तेजी आएगी और ऐसे तत्वों को बाहर रखा जा सकेगा, जो व्यवस्था को प्रभावित करते हैं।

कोरम पूरा करने के लिए 30 सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य
इसके अलावा विधेयक में पंचायतों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कोरम से जुड़े प्रावधानों में भी बदलाव किया गया है। अब ग्राम सभा की बैठक में कोरम पूरा करने के लिए पंचायत के कम से कम 30 सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। साथ ही कुल मतदाताओं की 10 प्रतिशत उपस्थिति भी आवश्यक मानी जाएगी। परिवार आधारित उपस्थिति को मान्य नहीं किया जाएगा। वहीं जिला परिषद स्तर पर भी कोरम की सीमा को संशोधित करते हुए इसे एक-तिहाई कर दिया गया है, जिससे बैठकों में निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज हो सके। इसके अलावा 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुका वह व्यक्ति, जिसका नाम परिवार रजिस्टर या ग्रामसभा की मतदाता सूची में दर्ज है, वह ग्राम सभा का सदस्य माना जाएगा।

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