दिल्ली में हिमाचल की हुंकार! CM सुक्खू ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से की मुलाकात

Edited By Jyoti M, Updated: 02 Mar, 2026 03:12 PM

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जब बात देश की अर्थव्यवस्था की होती है, तो अक्सर एक ही तराजू में सबको तौल दिया जाता है, लेकिन हिमाचल प्रदेश ने अब इस 'एक ही पैमाने' पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सोमवार को देश की राजधानी में एक अहम मुलाकात हुई, जहाँ मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने...

नई दिल्ली/शिमला:  जब बात देश की अर्थव्यवस्था की होती है, तो अक्सर एक ही तराजू में सबको तौल दिया जाता है, लेकिन हिमाचल प्रदेश ने अब इस 'एक ही पैमाने' पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सोमवार को देश की राजधानी में एक अहम मुलाकात हुई, जहाँ मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने दो टूक शब्दों में राज्य की वित्तीय चिंताओं को रखा। मुख्यमंत्री का तर्क साफ था: हिमालयी राज्यों की आर्थिक बनावट मैदानी इलाकों से अलग है, इसलिए उनके लिए नियम भी अलग होने चाहिए।

राजस्व अनुदान पर आर-पार की दलील

मुख्यमंत्री ने केंद्र से वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विशेष आर्थिक सहायता की मांग करते हुए 'रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट' (RDG) को जारी रखने की वकालत की। उन्होंने चेताया कि यदि इस मदद को रोका गया, तो प्रदेश की वित्तीय स्थिति चरमरा सकती है।

सुक्खू ने डेटा पेश करते हुए बताया कि हिमाचल की अर्थव्यवस्था में RDG का हिस्सा लगभग 12.7% है, जो नागालैंड के बाद देश में सर्वाधिक है। बड़े राज्यों के पास वैकल्पिक संसाधन हो सकते हैं, लेकिन दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों वाले हिमाचल के लिए यह अनुदान जीवनरेखा के समान है। सभी राज्यों को एक ही चश्मे से देखना 'सहकारी संघवाद' (Cooperative Federalism) के मूल सिद्धांत के विपरीत है।

संविधान और विकास की अनदेखी का मुद्दा

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने संविधान के अनुच्छेद 275(1) का हवाला दिया, जो राज्यों की आय और खर्च के बीच की खाई को पाटने के लिए अनुदान का अधिकार देता है। उन्होंने अफसोस जताया कि पहली बार वित्त आयोग ने छोटे पहाड़ी राज्यों की वास्तविक जरूरतों और उनकी विकास संबंधी बाधाओं को पूरी तरह दरकिनार कर दिया है।

अनुशासन के बावजूद आर्थिक दबाव

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि हिमाचल केवल मदद की गुहार नहीं लगा रहा, बल्कि खुद भी कड़े कदम उठा रहा है। उन्होंने वित्त मंत्री को जानकारी दी कि राज्य ने कोई ऑफ-बजट लोन नहीं लिया है।

विभिन्न उपकरों (Cess) के माध्यम से सालाना 600 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व जुटाया जा रहा है। सब्सिडी में कटौती और टैक्स दरों में सुधार जैसे कड़े फैसले लेने के बावजूद GST के कारण हुए घाटे की भरपाई करना नामुमकिन साबित हो रहा है।

समाधान की ओर कदम

मुख्यमंत्री ने केंद्र से आग्रह किया कि पहाड़ी राज्यों की विशिष्ट अर्थव्यवस्था को समझने और सुधार के रास्ते सुझाने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया जाए। इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री के साथ उनके मुख्य सलाहकार राम सुभग सिंह और प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार भी मौजूद रहे। केंद्रीय वित्त मंत्री ने इन मांगों को ध्यान से सुना और सकारात्मक रुख अपनाते हुए सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का भरोसा दिलाया।

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