Himachal: चमेरा बांध बना 'लकड़ियों का कब्रिस्तान', बिजली और सिंचाई संकट गहराया

Edited By Vijay, Updated: 24 Dec, 2025 12:16 PM

chamera dam

हिमाचल प्रदेश की रावी नदी पर बने चमेरा बांध में पानी का स्तर अपने न्यूनतम रिकॉर्ड पर पहुंच गया है, जिससे क्षेत्र में एक गंभीर पर्यावरणीय और आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। पानी का स्तर कम हाेने के साथ ही बांध की तलहटी में एक भयावह दृश्य सामने आया है।

चम्बा: हिमाचल प्रदेश की रावी नदी पर बने चमेरा बांध में पानी का स्तर अपने न्यूनतम रिकॉर्ड पर पहुंच गया है, जिससे क्षेत्र में एक गंभीर पर्यावरणीय और आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। पानी का स्तर कम हाेने के साथ ही बांध की तलहटी में एक भयावह दृश्य सामने आया है। अगस्त 2025 में आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान बहकर आए हजारों की संख्या में लकड़ी के लट्ठे अब तलहटी से निकल कर ऊपर आ गए हैं जाेकि बांध की दयनीय स्थिति को बयां कर रहा है। मानाें यहां काेई लकड़ियाें का कब्रिस्तान हाे।

बिजली उत्पादन और सिंचाई पर भारी असर
जल संकट का सीधा और तत्काल प्रभाव बिजली आपूर्ति और कृषि पर पड़ा है। चमेरा पनबिजली परियोजना से होने वाला बिजली उत्पादन पानी की कमी के कारण बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे कई इलाकों में बिजली कटौती का खतरा मंडरा रहा है। इसके अलावा, बांध से जुड़ी सिंचाई व्यवस्था ठप्प हो गई है। निचले इलाकों के किसान, जो अपनी फसलों के लिए इसी पानी पर निर्भर थे, अब सूखे खेतों को देखकर मायूस हैं।

वनों की कटाई और ग्लोबल वार्मिंग जिम्मेदार
विशेषज्ञों और हालिया रिपोर्ट्स ने इस स्थिति के लिए सीधे तौर पर मानवीय गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पहाड़ों में अंधाधुंध वनों की कटाई और बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम का चक्र बदल गया है। अनियमित बारिश और बढ़ते तापमान ने न केवल ग्लेशियरों को प्रभावित किया है, बल्कि नदियों के जल प्रवाह को भी कम कर दिया है।

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