Kangra: ​हजारों वर्ष पुराने ​शिव मंदिर में शिवलिंग पर लगाया 3 क्विंटल शुद्ध घी का लेप

Edited By Kuldeep, Updated: 14 Jan, 2026 06:57 PM

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मकर संक्रांति के पावन अवसर पर ऐतिहासिक शिव मंदिर बैजनाथ में मुख्य शिवलिंग पर 3 क्विंटल शुद्ध घी से बने माखन से लगभग 4 फुट ऊंचा घृत मंडल तैयार किया गया।

बैजनाथ (सुरिन्द्र): मकर संक्रांति के पावन अवसर पर ऐतिहासिक शिव मंदिर बैजनाथ में मुख्य शिवलिंग पर 3 क्विंटल शुद्ध घी से बने माखन से लगभग 4 फुट ऊंचा घृत मंडल तैयार किया गया। इस दिव्य अनुष्ठान में मंदिर के पुजारियों शांति स्वरूप, संजीव शर्मा, मनतेश घाबरू, संजय उपाध्याय, संजीव उपाध्याय, दीपाकर अवस्थी, सुरेंद्र आचार्य, उमाशंकर तथा धर्मेंद्र शर्मा ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस अवसर पर मंदिर परिसर को प्राकृतिक फूलों एवं विद्युत लड़ियों से सजाया गया। मंदिर में दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और दूर-दूर से आए भक्तों ने भगवान शिव के दर्शन कर पुण्य अर्जित किया। मंदिर प्रशासन के अनुसार घृत मंडल 21 जनवरी तक शिवलिंग पर चढ़ा रहेगा। 8वें दिन विधिवत पूजा-अर्चना के उपरांत घृत मंडल हटाकर श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा।

विधायक किशोरी लाल ने भी मंदिर में पहुंचकर भगवान शिव के दर्शन कर उनका आशीर्वाद लिया। मंदिर में नव युवा शिव शक्ति मंडल बैजनाथ के सौजन्य से जालपा ग्रुप द्वारा भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, वहीं मंडल द्वारा विधायक किशोरी लाल, जिला कांगड़ा अध्यक्ष अनुराग शर्मा, एसडीएम व तहसीलदार सहित अन्य गण्यमान्य लोगों को सम्मानित किया गया। मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में बैजनाथ क्षेत्र के अन्य प्रमुख मंदिरों पंडोल रोड स्थित पुट्ठे चरण मंदिर, संसाल का मुकट नाथ मंदिर, पलिकेश्वर मंदिर तथा महाकाल मंदिर में भी घृत मंडल चढ़ाए गए, जिससे क्षेत्र में उत्सव का माहौल रहा।
मान्यताएं और विश्वास

मकर संक्रांति पर शिवलिंग पर देसी घी का लेप किए जाने को लेकर विभिन्न मान्यताएं प्रचलित हैं। कुछ चिकित्सकों का मानना है कि 7 दिनों तक पवित्र शिवलिंग पर घृत मंडल चढ़े रहने, 108 बार ठंडे जल से अभिषेक तथा मेवों के संपर्क में रहने से यह घी औषधीय गुण धारण कर लेता है, जो चर्म रोगों के निवारण में सहायक माना जाता है। वहीं कुछ विशेषज्ञों के अनुसार यह माखन मॉइश्चराइजर के रूप में कार्य करता है और इसका उपयोग मुख्यतः भगवान के प्रति आस्था और परंपरा से जुड़ा हुआ है। कुल मिलाकर मकर संक्रांति पर आयोजित घृत मंडल पर्व ने आस्था, परंपरा और श्रद्धा का अनूठा संगम प्रस्तुत किया।

 

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