Hamirpur: बाबा बालक नाथ के दरबार में 10 दिन में बिका ₹60 लाख का प्रसाद, सात समंदर पार से आ रही भारी डिमांड

Edited By Vijay, Updated: 24 Mar, 2026 11:52 AM

baba balaknath temple deotsidh

उत्तरी भारत के सुप्रसिद्ध बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध में आजकल चैत्र मेले लगे हुए हैं, जिसके चलते देश-विदेश से हर रोज मन्दिर हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। वहीं बाबा बालक नाथ के प्रिय प्रसाद में रोट को माना जाता है।

दियोटसिद्ध (रजत): उत्तरी भारत के सुप्रसिद्ध बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध में आजकल चैत्र मेले लगे हुए हैं, जिसके चलते देश-विदेश से हर रोज मन्दिर हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। वहीं बाबा बालक नाथ के प्रिय प्रसाद में रोट को माना जाता है। चैत्र मेले के 10 दिनों में करीब 60 लाख रुपए का रोट बिक चुका है। मन्दिर के आसपास करीब 60 दुकानों में बाबा जी का रोट बिकता है। वहीं एक सर्वे के अनुसार प्रत्येक दुकानदार मेलों के दौरान प्रति दिन एक हजार के करीब रोट बेच रहा है। वहीं एक रोट की कीमत 10 रुपए की है। वहीं श्रद्धालु भी बाबा जी का रोट सबसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं, जिसके चलते चैत्र मेलों में बाबा जी के रोट की डिमांड बढ़ गई है। बाबा बालकनाथ के प्रसाद रोट की मिठास अब देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी पहुंच रही है। हमीरपुर जिले के दियोटसिद्ध में स्थित बाबा बालकनाथ के प्रसाद रोट ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। 

दियोटसिद्ध में बाबा बालकनाथ के लिए बनने वाला रोट का प्रसाद देश की सीमाओं को लांघ कर इंग्लैंड और कनाडा में पहुंच रहा है। वहीं विदेशों में रहने वाले बालयोगी के श्रद्धालु रोट को ऑनलाइन मंगवाकर बाबा जी का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। दुकानदार चमेल सिंह ने बताया कि इस रोट को वह सीधे तौर पर नहीं भेज पा रहे हैं परंतु यदि प्रशासन व्यवस्था बनाए तो इसे व्यापारिक रूप से और अधिक बढ़ाया जा सकता है। दुकानदारों की मानें तो विदेश में रह रहे भारतीय अपने रिश्तेदारों के माध्यम से इसकी डिलीवरी ले रहे हैं व इन्हें इंग्लैंड और कनाडा भेज रहे हैं। 

बता दें कि विदेशों में भेजे जाने वाले रोट को स्पैशल रूप से ग्राहक की डिमांड के अनुसार तैयार किया जाता है। इस रोट को देशी घी में मेवे के साथ आटे और मैदे में बनाया जाता है। इसकी कीमत 40 से 60 रुपए तक होती है व यह लंबे समय तक खाने के योग्य रहता है। इसी के साथ एक साल में करीब 20 ऑर्डर मिलते हैं। इस अवसर पर दुकानदार रजत ने कहा कि माता चिंतपूर्णी मंदिर की तरह इसे ऑनलाइन प्लेटफार्म मिलता है, तो इसे और अधिक विस्तार दिया जा सकता है व बाहरी देशों में रहने वाले भारतीय भी इसकी खरीद कर सकते हैं। इस संबंध में एसडीएम बड़सर स्वाति डोगरा का कहना है कि बाबा बालकनाथ मंदिर में प्रसाद को ऑनलाइन प्लेटफार्म पर लाने के लिए कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में इसकी गुणवत्ता, इसकी अवधि व इसे भेजने की पैकिंग को लेकर विचार-विमर्श किया जा रहा है। वहीं शीघ्र ही इसे ऑनलाइन प्लेटफार्म पर उपलब्ध करवा दिया जाएगा। 

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