Edited By Kuldeep, Updated: 16 Mar, 2026 10:03 PM

देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा हरीश राणा को इच्छा मृत्यु की अनुमति दिए जाने के फैसले के बाद उनके पैतृक गांव प्लेटा में सन्नाटा पसरा हुआ है।
आलमपुर (विजय): देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा हरीश राणा को इच्छा मृत्यु की अनुमति दिए जाने के फैसले के बाद उनके पैतृक गांव प्लेटा में सन्नाटा पसरा हुआ है। इस फैसले ने न केवल उनके परिवार को झकझोर दिया है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लोगों की ओखें नम कर दी हैं। ग्रामीणों के अनुसार हरीश राणा के पिता अशोक राणा ने प्लेटा गांव में एक नया घर बनाया है। अक्सर अपने घर आते-जाते रहते हैं। यह घर हरीश और उनके परिवार के लिए भविष्य की नई उम्मीदों का केंद्र था। आज उसी घर के आंगन में सन्नाटा है और गांव का हर शख्स इस खबर से दुखी है।
पंचायत निवासी खुशी राम भूरिया ने बताया कि हरीश एक मेधावी छात्र था और चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी का टॉपर था। सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक लेकिन विचलित कर देने वाले फैसले के बाद से गांव के लोग गमगीन हैं। गांव में होने वाली चर्चाओं में केवल हरीश व उनके परिवार के धैर्य की बातें हो रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हरीश के माता-पिता ने उन्हें इस स्थिति से निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। 13 साल से कोमा में रहे हरीश के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी गरिमामय मृत्यु की याचिका को स्वीकार किया है।