Edited By Vijay, Updated: 08 May, 2026 11:03 PM

कृषि विश्वविद्यालय में शुक्रवार को 17वें दीक्षांत समारोह द्वितीय चरण का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस समारोह में राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति कविंद्र गुप्ता मुख्यातिथि के रूप में उपस्थित रहे।
पालमपुर (भृगु): कृषि विश्वविद्यालय में शुक्रवार को 17वें दीक्षांत समारोह द्वितीय चरण का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस समारोह में राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति कविंद्र गुप्ता मुख्यातिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह में कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल के अध्यक्ष डॉ. संजय शर्मा तथा हिमाचल प्रदेश सरकार के कृषि सचिव सी. पलरासु ने भी विशेष रूप से भाग लिया। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एके पांडा, कुलसचिव डॉ. मधु चौधरी सहित सभी वैधानिक अधिकारी, प्राध्यापक, गण्यमान्य अतिथि एवं विद्यार्थी समारोह में उपस्थित रहे। दीक्षांत समारोह के दौरान कुल 1421 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जिनमें 340 विद्यार्थी समारोह में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि ने विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले 18 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया। उपाधियां प्राप्त करने वालों में से 340 ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर उपाधियां प्राप्त कीं।
इन्हें प्राप्त हुए स्वर्ण पदक
स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में शालिका कुमारी (शैक्षणिक वर्ष 2018-19), स्वातिलिका (2018-19), नवजोत सिंह ठाकुर (2019-20), शांभवी (2019-20), अदिति शर्मा (2019-20), शिवा (2019-20), आशिन शर्मा (2020-21), जितेन्द्र कुमार (2020-21), सुनंदा (2020-21), ममता (2021-22), मेहक (2021-22), कंचन (2021-22), समीक्षा (2021-22), रिद्धि सूद (2021-22), खुशबू देवी (2022-23), आशिमा सूद (2022-23), साक्षी वर्मा (2022-23) तथा शिल्पा ठाकुर (2022-23) शामिल रहे, जिन्होंने विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियां प्राप्त कीं।
डिग्री पाना अंतिम लक्ष्य नहीं, ज्ञान को खेतों तक पहुंचाएं
राज्यपाल एवं कुलाधिपति कविंद्र गुप्ता ने विद्यार्थियों को समाज की सेवा समर्पण, ईमानदारी और नैतिक मूल्यों के साथ करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति हैं और कृषि शिक्षा देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। राज्यपाल ने कहा कि शैक्षणिक उपाधि प्राप्त करना किसी भी छात्र के जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव होता है, किंतु यह अंतिम लक्ष्य नहीं है। उन्होंने बल देते हुए कहा कि वास्तविक चुनौती और सार्थकता इस अर्जित ज्ञान को व्यावहारिक धरातल पर उतारने में निहित है। उन्होंने युवा छात्रों से आह्वान किया कि वे अपने जीवन की दिशा का निर्धारण करें और अपनी मेधा का उपयोग विशेष रूप से राष्ट्र के अन्नदाताओं एवं कृषक समुदाय के उत्थान के लिए करें। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों तथा छात्रों से अपील की कि वैज्ञानिक अनुसंधानों को केवल प्रयोगशालाओं की फाइलों तक सीमित न रखकर सीधे प्रयोगशाला से खेतों तक पहुंचाया जाए।
शोध आधारित ज्ञान को निरंतर विस्तार देने की आवश्यकता
राज्यपाल ने आधुनिक कृषि की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए शोध आधारित ज्ञान को निरंतर विस्तार देने की आवश्यकता बताई। इससे पूर्व विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफैसर एके पांडा ने राज्यपाल का विधिवत स्वागत किया और विश्वविद्यालय की प्रगति की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित एएसआरबी के अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार ने कृषि आधारित अर्थव्यवस्था की वर्तमान प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला और विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
इन्होंने बढ़ाई कार्यक्रम की गरिमा
समारोह में पूर्व कुलपति डॉ. एसके शर्मा, डॉ. केके कटोच, डॉ. डीके वात्स तथा डॉ. प्रदीप कुमार सहित अनेक शिक्षाविदों और गण्यमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने भी कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। विश्वविद्यालय के प्रबंधन मंडल, सीनेट सदस्यों एवं विभागाध्यक्षों ने कुलसचिव के नेतृत्व में अकादमिक शोभायात्रा में भाग लिया। अंत में धन्यवाद प्रस्ताव के साथ समारोह का समापन हुआ।
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