Edited By Kuldeep, Updated: 28 Apr, 2026 07:03 PM

कृषि विश्वविद्यालय की 112 हैक्टेयर जमीन पर प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट में झटका लगा है। प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा अपने अंतरिम आदेश में 24 सितम्बर 2024 में कृषि विश्वविद्यालय की 112 हैक्टेयर भूमि को टूरिज्म विलेज परियोजना के लिए पर्यटन विभाग को...
पालमपुर (भृगु): कृषि विश्वविद्यालय की 112 हैक्टेयर जमीन पर प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट में झटका लगा है। प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा अपने अंतरिम आदेश में 24 सितम्बर 2024 में कृषि विश्वविद्यालय की 112 हैक्टेयर भूमि को टूरिज्म विलेज परियोजना के लिए पर्यटन विभाग को हस्तांतरित करने और उसकी प्रकृति बदलने पर रोक लगा दी थी। इसके पश्चात सरकार ने हाईकोर्ट की ओर से लगाई गई रोक को हटाने के लिए 30 मई 2025 को उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की थी, परंतु अब उच्चतम न्यायालय ने उस पर सुनवाई करने से इंकार करते हुए, हिमाचल सरकार की याचिका को खारिज कर दिया।
कृषि विश्वविद्यालय शिक्षक संघ पालमपुर ने हिमाचल सरकार द्वारा दायर इस याचिका को खारिज करने के लिए उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया था। कृषि विश्वविद्यालय प्राध्यापक संघ के महासचिव डॉ. जनार्दन सिंह ने इस मामले से संबंधित जानकारी सांझा करते हुए बताया कि प्रदेश सरकार ने कांगड़ा को पर्यटन राजधानी बनाने के लिए विश्वविद्यालय की भूमि को पर्यटन विभाग को हस्तांतरित करने का निर्णय लिया
। इसके विरोध में सितम्बर 2024 में कृषि विश्वविद्यालय प्राध्यापक संघ के तत्कालीन अध्यक्ष प्रोफैसर जनार्दन सिंह तथा राकेश चहोता ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। याचिका में स्पष्ट रूप से कहा गया कि यह भूमि कृषि अनुसंधान, फसल परीक्षण, पशुपालन अध्ययन और भविष्य की वैज्ञानिक परियोजनाओं के लिए अत्यंत आवश्यक है। नवम्बर 2024 में उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भूमि के स्वरूप में किसी भी प्रकार के बदलाव पर स्टे लगा दिया। इसके बाद राज्य सरकार ने इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी, जहां सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा, परंतु सर्वोच्च न्यायालय ने तथ्यों और शिक्षा के महत्व को देखते हुए उच्च न्यायालय के निर्णय को सही ठहराया और राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया।