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मनाली की विद्या वूमेन एक्सीलेंस अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित

  • मनाली की विद्या वूमेन एक्सीलेंस अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित
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Friday, January 19, 2018-4:24 PM

मनाली (सोनू):महिलाओं के लिए प्ररेणास्रोत बनी मनाली के शनाग गांव की समाज सेवी विद्या नेगी को वूमेन एक्सीलेंस अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया है। विद्या को यह अवार्ड समाज में उत्कृष्ट कार्यों, महिला सशक्तिकरण हेतु महिलाओं का समाजिक व आर्थिक विकास एवं समाजिक समानता हेतु कार्य करने पर दिया गया है। वूमेन एक्सीलेंस एचिवमेंट अवार्ड विया इंडिया अवार्ड ग्रुप राजस्थान के जयपुर में वीरवार देर शाम को  आयोजित कार्यक्रम में यह सम्मान दिया गया। विद्या की इस उपलब्धि से मनाली में खुशी की लहर है।
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विद्या नेगी ने मनाली का नाम देश में रोशन किया
विद्या नेगी ने मनाली का नाम देश में रोशन किया है। इनाम प्राप्त करने के बाद विद्या नेगी ने कहा कि आज महिलाएं पुरूषों के मुकाबले किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है। उन्होंने विया इंडिया अवार्ड संस्था का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मान देकर संस्था ने उन महिलाओं के आत्मविश्वास को बढा दिया है। सम्मान ग्रहण करने के बाद समाज सेवी विद्या नेगी ने कहा कि घर की चार दीवारी तक ही न सिमट कर प्रत्येक महिला को आत्मनिर्भर बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिला शिक्षित होगी तो समाज शिक्षित होगा। आज ऐसा कोई क्षेत्र नहीं जहां महिलाओं ने सफलता न पाई हो। उन्होंने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि लग्न व इच्छा शक्ति से आगे बढेंगे तो कामयावी जरूर कदम चूमेगी।
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21 साल की उम्र में पंचायत प्रधान बनी
दो दशक बेहतर समाज के निमार्ण के लिए समर्पित करने वाली विद्या नेगी ने कुदरत को बचाने में भी पहल की है। वह 21 साल की उम्र में पंचायत प्रधान बनी और महिलाओं के हितों के लिए कई कार्य किए। हिमालयन नीति अभियान से जुडकर विद्या नेगी ने जन, जल जंगल, जानवर व जमीन में बेहतर तालमेल बनाए रखने के विषय पर भी विद्या नेगी ने सराहनीय कार्य किया है। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल व संरक्षण पर भी काम किया। जीवन में लगातार संघर्ष करने वाली विद्या नेगी ने नशावंदी, दहेज प्रथा, महिला उत्पीडन और महिलाओं के अधिकारों के लिए जुटी रही।

जाति प्रथा के अभिशाप को दूर करने के लिए भी काम किया
1992 से साक्षरता अभियान से जुडी और उन्होंने गांव-गांव जाकर साक्षर बनाने की दिशा में अपना योगदान दिया। उन्होंने कुल्लू, चंबा और कांगडा के दूरदराज क्षेत्रों की महिलाओं की मदद करने के लिए रूरल टेक्नोलाजी डिवेल्पमेंट सेंटर का गठन किया और आज तक लगभग 300 महिला उत्पीड़न के मामले सुलझाए। उन्होंने जाति प्रथा के अभिशाप को दूर करने के लिए भी काम किया। उन्होंने इस विषय पर द करेज रोड से ट्रेवल नामक एक डक्यूमेंट्री भी बनाई। उन्होंने कुल्लू के लगभग 700 महिला मंडलों का गठन कर ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनो में अहम भूमिका निभाई। 
 


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