Edited By Vijay, Updated: 21 Feb, 2026 07:48 PM

भारत ने स्वास्थ्य सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने कसौली स्थित केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (सीआरआई) में स्वदेशी रूप से विकसित टैटनस और एडल्ट डिप्थीरिया (टीडी)...
कसौली (जितेंद्र): भारत ने स्वास्थ्य सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने कसौली स्थित केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (सीआरआई) में स्वदेशी रूप से विकसित टैटनस और एडल्ट डिप्थीरिया (टीडी) वैक्सीन का विधिवत शुभारंभ किया। इस वैक्सीन को भारत के यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (यूआईपी) में शामिल कर लिया गया है, जो देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी।
जेपी नड्डा ने वैज्ञानिकों की मेहनत को सराहा
जेपी नड्डा ने इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया। उन्होंने सीआरआई कसौली के वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता उनकी कड़ी मेहनत का परिणाम है। नड्डा ने कहा कि यह कदम न केवल राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा, बल्कि भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को भी मजबूती प्रदान करेगा। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और राज्य स्वास्थ्य विभागों के प्रतिनिधियों के साथ सीआरआई की निदेशक डॉ. डिंपल कसाना विशेष रूप से उपस्थित रहीं।
आत्मनिर्भर भारत का सपना हो रहा साकार
जेपी नड्डा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने स्वास्थ्य और औषधि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का स्पष्ट लक्ष्य रखा है। स्वदेशी टीडी वैक्सीन का निर्माण 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक ठोस पहल है। उन्होंने दोहराया कि भारत को अब विश्व भर में "फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड" के रूप में मान्यता मिल चुकी है।
अप्रैल 2026 तक 55 लाख डोज की आपूर्ति का लक्ष्य
टीडी वैक्सीन के लॉन्च के साथ ही इसकी आपूर्ति की रूपरेखा भी तय कर दी गई है। सीआरआई कसौली अप्रैल 2026 तक यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम के तहत इस वैक्सीन की 55 लाख डोज की आपूर्ति करेगा। इससे देश के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान को निर्बाध गति मिलेगी।
जहां सदियां लगती थीं, वहां अब महीनों में निकल रहा परिणाम
जेपी नड्डा ने भारत की बदलती चिकित्सा क्षमता पर प्रकाश डालते हुए पुराने दौर और आज के भारत की तुलना की। उन्होंने बताया कि टैटनस वैक्सीन को विकसित होने में दशकों लग गए थे। टीबी की दवाओं के लिए भारत को लगभग 30 वर्ष इंतजार करना पड़ा और जापानी इंसेफेलाइटिस वैक्सीन के विकास में लगभग एक सदी का समय लगा। इसके विपरीत, कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने मात्र 9 महीनों में 2 स्वदेशी वैक्सीन विकसित कर दुनिया को चौंका दिया। भारत ने न केवल अपने नागरिकों को सुरक्षा दी, बल्कि 220 करोड़ से अधिक डोज (बूस्टर सहित) प्रदान कर एक रिकॉर्ड कायम किया।
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