Edited By Swati Sharma, Updated: 18 Mar, 2026 04:32 PM

Himachal Budget Session : हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। ऊना से भाजपा विधायक सतपाल सत्ती ने भ्रष्टाचार में फंसे अधिकारी को रिटायरमेंट के बाद फिर से नौकरी देने का...
Himachal Budget Session : हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। ऊना से भाजपा विधायक सतपाल सत्ती ने भ्रष्टाचार में फंसे अधिकारी को रिटायरमेंट के बाद फिर से नौकरी देने का मामला उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि ऊना में रिश्वत कांड में नाम आने के बावजूद एक अधिकारी को सेवा विस्तार दिया गया, जो प्रशासनिक नैतिकता पर सवाल खड़े करता है।उन्होंने सवाल किया कि जब अधिकारियों की सत्यनिष्ठा संदिग्ध है, तो उन्हें लाखों रुपये के मानदेय पर दोबारा क्यों रखा जा रहा है?
मुख्यमंत्री का सदन में बड़ा फैसला
विपक्ष के तीखे तेवरों को देखते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि जिन अधिकारियों का नाम 'ऑफिशियल विद डाउटफुल इंट्रेग्रिटी' (ODI) यानी संदिग्ध सत्यनिष्ठा वाली सूची में शामिल है, उन्हें सेवा विस्तार से तत्काल प्रभाव से हटाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति दोहराते हुए यह कदम उठाने का आश्वासन दिया।
क्या होता है ओडीआई?
ODI सूची में उन अधिकारियों को शामिल किया जाता है, जिनकी सत्यनिष्ठा संदिग्ध मानी जाती है या जिनका नाम किसी विवाद अथवा कानूनी मामलों में सामने आया हो। वहीं, सरकार ने तीन ऐसे अधिकारियों को सेवा विस्तार दिया था, जिनके नाम ODI सूची में शामिल हैं।
इन तीन अफसरों के नाम ODI सूची में शामिल
विजय कुमार राय (सेवानिवृत्त तहसीलदार): राजस्व विभाग के सेवानिवृत्त तहसीलदार विजय कुमार राय को 1 अक्टूबर 2024 से 28 फरवरी 2025 तक छह माह के लिए नियुक्त किया गया था, जिन्हें लगभग 38,760 रुपये प्रतिमाह वेतन दिया गया।
युद्धवीर सिंह ठाकुर (OSD): कोष, लेखा एवं लॉटरी विभाग में युद्धवीर सिंह ठाकुर को विशेष कार्य अधिकारी (OSD) के रूप में 20 मई 2024 से 19 नवंबर 2024 तक पुनर्नियुक्त किया गया, जिनका मासिक मानदेय 1,11,242 रुपये रहा।
राय बहादुर सिंह नेगी: प्रशासनिक सुधार विभाग में राय बहादुर सिंह नेगी को फरवरी 2024 से जुलाई 2024 तक छह माह के लिए सेवा विस्तार दिया गया, जिसके तहत उन्हें प्रतिमाह 1,31,404 रुपये, कुल 7,88,424 रुपये का भुगतान किया गया। इसके बाद पुनर्नियुक्ति के तहत उन्हें 37,320 रुपये प्रतिमाह और सालाना 2,23,920 रुपये दिए गए।
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