नूरपुर वन मंडल में अवैध कटान का सनसनीखेज खुलासा, समय सीमा खत्म...फिर भी जारी है कटान

Edited By Swati Sharma, Updated: 15 Apr, 2026 06:53 PM

sensational revelation of illegal felling in the noorpur forest division

कांगड़ा (दुर्गेश कटोच) : नूरपुर वन मंडल की ज्वाली रेंज के अंतर्गत हटली विट (हौरि देवी क्षेत्र) के जंगलों में खैर के पेड़ों का कटान लगातार जारी है, वह भी निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बावजूद। जब इस पूरे मामले की पड़ताल की गई, तो एएम ज्वाली राकेश...

कांगड़ा (दुर्गेश कटोच) : नूरपुर वन मंडल की ज्वाली रेंज के अंतर्गत हटली विट (हौरि देवी क्षेत्र) के जंगलों में खैर के पेड़ों का कटान लगातार जारी है, वह भी निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बावजूद। जब इस पूरे मामले की पड़ताल की गई, तो एएम ज्वाली राकेश ने साफ तौर पर कहा कि “आज कोई भी कटान नहीं चल रहा है।” लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही थी। मौके पर पहुंचकर देखा गया कि खैर के पेड़ों की कटाई खुलेआम जारी थी।

वहीं, इस संबंध में जब हौरि देवी के फॉरेस्ट गार्ड लक्ष्य कटोच से बात की गई, तो उन्होंने खुद माना कि कटान आज ही शुरू हुआ है। जब कटान के आदेश के बारे में पूछा गया, तो जो दस्तावेज सामने आए, वे 3 मार्च 2026 के थे और अगले 30 दिनों के भीतर कार्य पूरा करना अनिवार्य था। यानी साफ है कि तय समय सीमा समाप्त होने के बावजूद कटान जारी है। मामले ने और तूल तब पकड़ा जब फॉरेस्ट कॉरपोरेशन ज्वाली से जुड़े एक वर्कर रवि से बातचीत हुई। रवि ने बताया कि “एएम साहब ने खुद आज कटान के लिए भेजा था।” हालांकि, हैरानी की बात यह रही कि रवि के पास भी संबंधित वर्क ऑर्डर की कोई कॉपी मौजूद नहीं थी।

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सवालों को टालने और बात को घुमाने की कोशिश

इसी दौरान जब टीम मौके से वापस लौट रही थी, तो फतेहपुर-रैहन रोड पर खैर के मोछों (लकड़ी) से लोड एक गाड़ी जाती हुई दिखाई दी। यह गाड़ी बाद में बरोट से होरी मार्ग की ओर मुड़ गई और बगडोली में स्थित एक तालाब के पास रोकी गई, जहां लोड की गई लकड़ी को अनलोड किया जाने लगा। जब इस डंपिंग को लेकर फिर से संबंधित विट के फॉरेस्ट गार्ड लक्ष्य कटोच से पूछा गया कि क्या इसके लिए कोई अनुमति दी गई है, तो उन्होंने जिम्मेदारी सारी कॉरपोरेशन पर डाल दी। वहीं, फिर से जब फारेस्ट कारपोरेशन  के वर्कर रवि से जब जानकारी लेनी चाही गई, तो उसने सवालों को टालने और बात को घुमाने की कोशिश की। अब सवाल उठ रहे हैं कि समय सीमा खत्म होने के बावजूद कटान किसके आदेश पर हो रहा है? क्या जिम्मेदार अधिकारी सच्चाई छुपाने की कोशिश कर रहे हैं? बिना वैध दस्तावेजों के कटान और लकड़ी का परिवहन कैसे हो रहा है? डंपिंग की अनुमति किसने दी?

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विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

यह मामला वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी या नहीं।

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