धागा और प्लास्टिक उद्योगों के लिए बड़ी चुनौती: कच्चा माल हुआ महंगा, जानें कितने बढ़े रेट

Edited By Jyoti M, Updated: 26 Mar, 2026 11:43 AM

raw materials for the thread and plastics industries have become more expensive

खाड़ी युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी उछाल ने बीबीएन (बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़) के धागा और प्लास्टिक उद्योगों के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि के कारण अब तैयार उत्पादों के दाम बढ़ने की भी पूरी संभावना है।

हिमाचल डेस्क। खाड़ी युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी उछाल ने बीबीएन (बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़) के धागा और प्लास्टिक उद्योगों के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि के कारण अब तैयार उत्पादों के दाम बढ़ने की भी पूरी संभावना है।

पिछले कुछ समय में फाइबर के रेट 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं, जिसका सीधा असर धागे की कीमतों पर पड़ा है और इनमें 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा, उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले हाई स्पीड डीजल के दामों में 20 से 30 प्रतिशत और प्रोपेन गैस की कीमतों में 55 प्रतिशत का भारी उछाल आया है।

उद्योगों पर पड़ रहे इस दोहरे दबाव का असर केवल कच्चे माल तक सीमित नहीं है। पैकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली स्ट्रेच रैपिंग के दाम 86 रुपये से बढ़कर 109 रुपये हो गए हैं, जबकि धागा बनाने में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक दाने की कीमतों में भी 30 से 50 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। साथ ही, माल ढुलाई के भाड़े में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

सबसे बड़ी समस्या उन धागा मिलों के सामने है जिन्होंने तीन महीने पहले ही पुराने रेट पर बुकिंग कर ली थी। ग्राहकों के साथ संबंध खराब न हों, इसलिए ये उद्योग फिलहाल घाटा सहकर भी माल की आपूर्ति कर रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल के दाम जो 122 डॉलर तक पहुंच गए थे, उनमें अब धीरे-धीरे गिरावट आ रही है और वे 88 डॉलर के करीब पहुंच गए हैं। यदि आने वाले दिनों में स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं होती है, तो कंपनियों के पास तैयार माल की कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचेगा।

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