3 वर्ष बाद चंद्रा घाटी के दौरे पर निकले आराध्यदेव राजा घेपन, गुंचलिंग में हुआ देव मिलन

Edited By Vijay, Updated: 23 Oct, 2020 07:18 PM

raja ghepan on tour of chandera valley

लाहौल घाटी के आराध्यदेव राजा घेपन 3 वर्ष बाद 3 दिन के लिए चंद्रा घाटी के दौरे पर निकले हैं। दौरे के दूसरे दिन वीरवार को लाहौल के अधिष्ठाता राजा घेपन से मिलने के लिए देव मिलन स्थल गुंचलिंग में शूलिंग की देवी मोगार, रालिंग के देवता ड्राबला व मरगेद के...

मनाली (ब्यूरो): लाहौल घाटी के आराध्यदेव राजा घेपन 3 वर्ष बाद 3 दिन के लिए चंद्रा घाटी के दौरे पर निकले हैं। दौरे के दूसरे दिन वीरवार को लाहौल के अधिष्ठाता राजा घेपन से मिलने के लिए देव मिलन स्थल गुंचलिंग में शूलिंग की देवी मोगार, रालिंग के देवता ड्राबला व मरगेद के देवता सहित 8 देवी-देवताओं का मिलन हुआ। देव मिलन को देखने श्रद्धालु सुबह से ही सक्कर गांव पहुंचना शुरू हुआ। एसडीएम केलांग और सीएमओ घेपन कमेटी से मिलने और भीड़ की स्थिति का जायजा लेने पहुंचे। उन्होंने मास्क पहनने और सामाजिक दूरी बनाए रखने के भी निर्देश दिए।
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राजा घेपन की देवी भगवती से मिलने की थी इच्छा

साढ़े 3 बजे घेपन के गुर टशी, मिलंग तेते के गुर छेरिंग टशी व फाह प्रकाश सहित घेपन और देवी बोटी के हारुका तथा अन्य 8 देवी-देवताओं के हारियान ने सक्कर से पैदल गुंचलिंग चलना शुरू किया और पवित्र चश्मे के पानी से शुद्धि कर देवता मिलंग तेते के गुर और हरुकाओं से मुलाकात कर गुंचलिंग पहुंचे। सभी ने देव रीति के साथ पूजा-अर्चना की। राजा घेपन ने गुर के माध्यम से कहा कि अब आगे की यात्रा नहीं होगी। देवी भगवती से मिलने की इच्छा थी वह यहीं पूरी हो गई और यहां गुंचलिंग में पहुंच गई है।

एक रात जागला के कुंभ स्थल में विराजमान होंगे राजा घेपन व देवी बोटी

राजा घेपन कमेटी के अध्यक्ष पूर्ण चंद शाशनी ने कहा कि शनिवार को शाम के समय सभी देवता अपने निवास स्थल की ओर प्रस्थान करेंगे। वापसी में गांव में प्रवेश नहीं किया जाएगा। एक रात जागला के कुंभ स्थल में राजा घेपन और देवी बोटी विराजमान होंगे। वहीं रविवार को रोपसंग में देवी बोटी के स्थल में राजा घेपन रुकेंगे। अगले रोज सोमवार को देवी बोटी और घेपन शाशिन थान में रुकेंगे। मंगलवार को जगदंग के यंगलिंग स्थित राजा घेपन थान में दोनों विराजमान होंगे जबकि अगले रोज शाशिन आकर राजा घेपन देवी बोटी को रोपसंग के लिए विदा करेंगे। इसके बाद शुभ मुहूर्त देखकर राजा घेपन अगले 3 वर्षों के लिए अपने देवालय लौट जाएंगे।

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