आने वाले समय में सरकार से राहत की कम और आफत की ज्यादा उम्मीद रखे जनता : राणा

Edited By prashant sharma, Updated: 24 Apr, 2020 05:49 PM

people should expect less relief from government

लॉकडाउन का पीरियड अनिश्चितता के दौर में है लेकिन सरकार ने अपना रंग अभी से दिखाना शुरू कर दिया है। यह बात राज्य कांग्रेस उपाध्यक्ष एवम विधायक राजेंद्र राणा ने कही। उन्होंने कहा कि आगामी डेढ़ साल तक कर्मचारियों का डीए फ्रीज करके सरकार ने बता दिया है कि...

हमीरपुर : लॉकडाउन का पीरियड अनिश्चितता के दौर में है लेकिन सरकार ने अपना रंग अभी से दिखाना शुरू कर दिया है। यह बात राज्य कांग्रेस उपाध्यक्ष एवम विधायक राजेंद्र राणा ने कही। उन्होंने कहा कि आगामी डेढ़ साल तक कर्मचारियों का डीए फ्रीज करके सरकार ने बता दिया है कि बीजेपी सिर्फ लेना जानती है देना नहीं? जो चुनावों के वक्त डबल इंजन का राग अलापते थे उन्होंने अब कोरोना का बहाना करके लूटे-पिटे वर्ग को निचोडने का मंसुबा तैयार करना शुरू कर दिया है। वक्त आफत काल का हो या राहत का हो, बीजेपी की सरकारें सिर्फ बड़े-बड़े एलान करना जानती है। 

उन्होंने कहा कि हैरानी यह है कि इस देश में अकेले पेट्रोल से रोजाना हजारों करोड़ का राजस्व आता है। क्योंकि हमारी सरकार दूसरे देशों से करीब 25 रूपए प्रति लीटर ज्यादा दाम वसूलती है। ऐसे में आखिर पैसा जाता कहां है? इस वक्त संकट में फंसी जनता के लिए यह सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। बीजेपी वन और टू का कार्यकाल गवाह है कि देश के आम आदमी के लिए देश का खजाना हमेशा खाली बताया जाता है। चुनावों के समय डबल इंजन का झांसा देने वाली बीजेपी सरकार ने प्रदेश सरकार को फार्वडिंग कॉपी सरकार बनाकर रख दिया है। प्रदेश की सरकार अब लेटर बॉक्स की भूमिका में एक ही काम करती है कि नीचे की चिट्ठी ऊपर और ऊपर की चिट्ठी नीचे पहुंचाती है। प्रचंड बहुमत से जीती सरकार को इस संकटकाल में प्रदेश की जनता की मददगार सरकार साबित होना था जबकि सरकार इस संकटकाल में आम आदमी से भी असहाय नजर आ रही है। 

उन्होंने कहा कि सरकार इस संकटकाल में आर्थिक मोर्चे पर बुरी तरह फ्लॉप हुई है लेकिन बावजूद इसके सरकार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब नहीं है जितनी बताई व दिखाई जा रही है। केन्द्र से करीब 950 करोड़ रुपए आपदा प्रबंधन के लिए आया है। केन्द्र से कुछ और भी एडवांस फंड आए हैं लेकिन हकीकत में इस हजारों करोड़ के बजट की जनता को उतनी राहत नहीं मिल पा रही है जितनी इस दौर में मिलनी जरूरी है। सरकार इस आपदा के समय भी राजनीति कर रही है। दान किसी से करवा रहे हो और बंटवाने के लिए अपने लोगों को भेज रहे हैं। महामारी के  दौर में जब तमाम जनता व विपक्ष सरकार का सहयोग कर रहे हैं तो सरकार महामारी में लूटे-पिटे आम वर्ग को और निचोडने के मसौदे तैयार कर रही है। 

उन्होंने कहा कि वह लॉकडाउन की शुरू तिथि से ही लगातार कह रहे हैं कि सरकार आर्थिकी पर ध्यान दे और आम आदमी के लिए योजनाएं बनाए। महामारी के इस दौर ने जहां यूरोप और अमेरिका सरीखे मुल्कों को खून के आंसु रूला दिया है ऐसे में हमारी सरकार लेटर बॉक्स की भूमिका में रहती हुई अब आम आदमी को खून के आंसु रूलाने पर अमादा है। सरकार बस अब एक ही एजेंडा बनाकर चल रही है कि कोरोना के बहाने आम जनता पर जितना बोझ डाला जा सकता है डाला जाए। जिसको देखकर आने वाले वक्त में सरकार की राहत की उम्मीद कम और आफत की उम्मीद ज्यादा है।
 

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