Kangra: एक बच्चे वाले परिवार को सुविधाएं दे सरकार : शांता

Edited By Kuldeep, Updated: 15 Dec, 2025 04:48 PM

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शांता कुमार ने कहा कि इस गरीबी, बेरोजगारी और जानलेवा प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण बढ़ती जनसंख्या है। उन्होंने कहा कि यह ठीक है कि जनसंख्या रोकने का कानून बनाकर एकदम कोई लाभ नहीं होगा।

पालमपुर (भृगु): शांता कुमार ने कहा कि इस गरीबी, बेरोजगारी और जानलेवा प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण बढ़ती जनसंख्या है। उन्होंने कहा कि यह ठीक है कि जनसंख्या रोकने का कानून बनाकर एकदम कोई लाभ नहीं होगा। परंतु इस सबसे बड़े कारण को राेकने की शुरूआत होगी। सरकार कानून से 2 बच्चों से अधिक बिल्कुल नहीं, इतना ही नहीं एक बच्चे वाले परिवार को इतनी सुविधाएं दे कि आबादी बढ़ने से रुके भी व घटनी भी आंरभ हो जाए। आज की इन भयंकर समस्याओं के चलते सभी देशों में बढ़ रही आबादी रोकनी पडे़गी। विश्व के कई देशों ने आबादी को रोका है, तो भारत क्यों नहीं रोक सकता।

पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की राजधानी दिल्ली जहरीली हवा के रैड जोन में पहुंच गई है। दिल्ली ही नहीं, भारत के बहुत से नगर गैस चैम्बर बनते गए। जहरीली हवा से बच्चों में कैंसर तक की बीमारी फैल रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार 2022 में भारत में 17 लाख लोग केवल वायु प्रदूषण के कारण मरे। उन्होंने कहा कि भारत विश्व के 193 देशों में सबसे अधिक अमीर 4 देशों में शामिल है। परन्तु विश्व के सबसे अधिक गरीब और भूखे लोग भी भारत में रहते हैं, कारण लगातार टिड्डी दल की तरह बढ़ती जनसंख्या और आर्थिक विषमता है। शांता कुमार ने कहा कि नरेन्द्र मोदी के सारे प्रयत्नों के बाद भी गरीबी और बेरोजगारी बढ़ रही है। ग्लोबल हंगर इंडैक्स के अनुसार भारत में लगभग 19 करोड़ लोग रात में भूखे पेट सोते हैं।

बेरोजगारी बढ़ने के कारण अपराध बढ़ रहे हैं और आत्महत्याएं बढ़ रही हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले वर्ष 1,87,000 लोगों ने आत्महत्या की, जिनमें 13,000 छात्र शामिल थे। मनुष्यों की आबादी के साथ कुत्तों की आबादी भी इतनी बढ़ गई कि कुत्तों के काटने का विषय सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। उन्होंने कहा कि एक तरफ यह डरावनी तस्वीर और दूसरी तरफ टिड्डी दल की तरह बढ़ती आबादी। 1947 में दिल्ली में 7 लाख लोग रहते थे और आज दिल्ली की आबादी 3 करोड़ 46 लाख हो गई है, जो 50 गुना बढ़ गई है। भारत की आबादी 1947 में 35 करोड़ थी जो आज बढ़कर 143 करोड़ के लगभग हो गई है। प्रतिवर्ष 2 करोड़ आबादी बढ़ रही है।

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