Sirmour: रैस्क्यू के कुछ घंटों बाद गोट फार्म में घुसी मादा तेंदुए की मौत

Edited By Kuldeep, Updated: 24 Feb, 2026 10:06 PM

nahan female leopard death

वन मंडल नाहन के अंतर्गत सतीवाला पंचायत के जोगीबन में गोट फार्म में घुसी मादा तेंदुए को सोमवार दोपहर कड़ी मशक्कत के बाद जिंदा रैस्क्यू किया गया था, उसने कुछ घंटों बाद रात करीब 11 बजे उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।

नाहन (आशु): वन मंडल नाहन के अंतर्गत सतीवाला पंचायत के जोगीबन में गोट फार्म में घुसी मादा तेंदुए को सोमवार दोपहर कड़ी मशक्कत के बाद जिंदा रैस्क्यू किया गया था, उसने कुछ घंटों बाद रात करीब 11 बजे उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। करीब 2 वर्ष की इस मादा तेंदुए को वन विभाग की टीम ने संकरे कलवर्ट (पाइप) से बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार के बाद एनिमल रैस्क्यू सैंटर टूटीकंडी, शिमला शिफ्ट किया था, लेकिन वह जिंदगी की जंग हार गई। वन विभाग ने पोस्टमार्टम करवा लिया है। मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा अब रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा, लेकिन शुरूआती अनुमान कई गंभीर पहलुओं की ओर इशारा कर रहे हैं।

कुत्तों के हमले से गंभीर चोटें या फिर अन्य वजह
जानकारी के अनुसार गोट फार्म में घुसते ही कुत्तों ने तेंदुए को घेर लिया था। इसके बाद सुबह कलवर्ट के साथ टकराव व कुत्तों के हमलों से मादा तेंदुआ घायल हो गई थी। संभवतः हमला इतना जबरदस्त था कि वह गहरे जख्म और सदमे से उभर नहीं पाई हो। दूसरी ओर जिस संकरे पाइप में वह छिपी थी, वहां पानी का रिसाव भी हो रहा था। रैस्क्यू के दौरान यह मादा तेंदुआ सिकुड़ी अवस्था में मिली थी। पाइप के भीतर घुटन, लंबे समय तक फंसे रहने का तनाव, खाली पेट होना या अत्यधिक कमजोरी, ये सभी कारण भी हालात बिगड़ने की वजह हो सकते हैं। वन विभाग के सूत्रों के मुताबिक इन सभी संभावित कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही हो पाएगी।

3 घंटे का रैस्क्यू लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया
गौरतलब है कि रविवार-सोमवार रात जोगीबन के गोट फार्म में घुसे तेंदुए ने दहशत फैला दी थी। कुत्तों ने पूरी रात मोर्चा संभाले रखा। सुबह गेट खुलते ही मादा तेंदुआ बौखला गई और पास के नाले के कलवर्ट में जा घुसी। इससे पहले उसने संग्राम और नीरज पर हमला कर दिया था, जिन्हें कुत्तों की बहादुरी ने बचा लिया। दोपहर करीब एक बजे वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। पाइप के एक सिरे को जाली से बंद कर दूसरे सिरे पर पिंजरा लगाया गया।

प्रयास विफल रहने पर ट्रैंक्विलाइजर गन से बेहोशी का इंजैक्शन दागा गया। पानी के रिसाव और संकरे स्थान के बीच एक वनरक्षक ने जान जोखिम में डालकर पाइप में घुसकर तेंदुए को रस्सी से बांध कर बाहर खींचा। करीब 3 घंटे चले ऑप्रेशन के बाद उसे सुरक्षित निकाला गया। रैस्क्यू के बाद उसे प्राथमिक उपचार देते हुए शिमला भेजा गया, लेकिन रात में उसकी मौत की खबर ने वन विभाग को भी स्तब्ध कर दिया।

डीएफओ वन मंडल नाहन अवनी भूषण राय का कहना है कि मादा तेंदुआ घायल अवस्था में रैस्क्यू की गई थी। प्राथमिक उपचार के बाद उसे शिमला के रैस्क्यू सैंटर भेजा गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। मौत के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल पाएगा।

 

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